तुलसीदासजी की लेखनी में भगवान राम की कृपा से दिव्य शक्ति समार्इ थी। उन्होंने रामचरितमानस में भगवान की स्तुति के लिए जो शब्द उपयोग में लिए उनमें मंत्रों के समान बल था। आज भी अनेक लोग मनोकामना पूर्ण करने के लिए मानस की इन चौपाइयों का मंत्रों के समान जाप करते हैं। आप भी पढ़िए, रामचरितमानस की कौनसी चौपार्इ का किस कार्य के लिए जाप किया जा सकता है।
विपत्ति से मुक्ति के लिए मानस की ये चौपार्इ बहुत शुभफलदायी है-राजिव नयन धरैधनु सायक।भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।।
अगर अकालमृत्यु से रक्षा चाहते हैं तो इस चौपार्इ का जाप करें- नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट।लोचन निज पद जंत्रित प्रान केहि बात।।
अगर मित्र रूठ जाए अथवा शत्रु की तरह बर्ताव करे तो इस चौपार्इ का जाप करें। इसका जाप शत्रु को मित्र बनाने के लिए किया जाता है-गरल सुधा रिपु करहि मिताई।गोपद सिंधु अनल सितलाई।।
जाने-अनजाने में हुए पाप का दोष सच्चे हृदय से किए गए पश्चाताप आैर इस चौपार्इ के जाप से दूर होता है।अनुचित बहुत कहेउं अग्याता।छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।।