मधुमक्खियों के लिंग निर्धारण का तरीका पता चला

लंदन (एजेंसी)। मधुमक्खियों की अनोखी लिंगनिर्धारण प्रणाली जिसमें नर मधुमक्खी अनिषेचित अंडों से विकसित होती है और मादा मधुमक्खी निषेचित अंडों से विकसित होती है गलत है। आनुवांशिक लिंग निर्धारण-हेप्लोडिप्लोइडी में बदलाव करने वाले वैज्ञानिक कहते हैं कि पांच एमिनो एसिड नर मधुमक्खियों को मादा मधुमक्खियों से अलग करते हैं। अध्ययन के सह-लेखक और अरिजोना स्टेट युनिवर्सिटी के प्रोवोस्ट रॉबर्ट ई. पेज तथा मुख्य लेखक व जर्मनी की युनिवर्सिटी ऑफ डसेलडोर्फ में इंस्टीट्यूट ऑफ इवोल्यूशनरी जेनेटिक्स के प्रोफेसर मार्टिन बेये ने मधुमक्खियों के 76 जीनोटाइप्स के लिए पूरक लिंग निर्धारण स्विच (कॉम्प्लीमेंटरी सेक्स डिटरमाइनिंग स्विच : सीएसडी जीन) के 14 प्राकृतिक सीक्वेंस वेरिएंट का अध्ययन किया। अध्ययन में लेखकों ने पाया कि कम से कम पांच एमिनो एसिड असमानताएं सीएसडी (नियंत्रण स्विच) मादा बनाने की युग्मविकल्पीय असमानताओं को नियंत्रित कर सकती हैं। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि मधुमक्खियों में उच्च पुनर्संयोजन दर है। पुनर्संयोजन वह प्रक्रिया है जिससे यौन प्रजनन के दौरान आनुवांशिक सामग्री मिश्रित होती है। करंट बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि इससे शोधकर्ताओं को पूरक लिंग निर्धारण बिंदुपथ को चिन्हित अलग और अनुक्रमित करने में मदद मिली। पेज ने कहा ‘‘हमने खोजा कि एरजिनाइन सेरीन और प्रोलाइन सीएसडी जीन पर प्रोटीन के बंधों को प्रभावित करते हैं जिसके बदले मधुमक्खियां विभिन्न रचनात्मक अवस्थाओं को जन्म देती हैं क्रियात्मक बदलावों को प्रेरित करती हैं। इससे मादा से नर में स्थानांतरण का निर्धारण होता है।’’ अंतत: सूक्ष्मतम स्तर पर विकसित हेप्लोडिप्लोइड लिंग निर्धारण प्रणाली ने विकास जेनेटिक्स में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े किया है। हेप्लोडिप्लोइडी वह प्रक्रिया है जिसके तहत नर मधुमक्खियां अनिषेचित अंडों से बनती हैं और मादा निषेचित अंडों से बनती है। इस प्रणाली में मधुमक्खयों और ततैया का लिंग निर्धारण उन्हें मिलने वाले गुणसूत्रों के सेट की संख्या के आधार पर होता है।