झारखण्डराज्य

रिम्स ओपीडी खुली, 946 मरीज पहुंचे जिनमें 30 प्रतिशत में सांस लेने की समस्या

रिम्स ओपीडी में जांच के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का पालन करने पर ही इंट्री। - Dainik Bhaskar

सिर्फ दो विभागों को छोड़कर रिम्स के सभी विभागों की ओपीडी बुधवार से खुल गई है। ओपीडी खुलते ही अस्पताल में मरीजों की कतार लग गई। रिम्स प्रबंधन के अनुसार, बुधवार को ओपीडी में कुल 946 मरीज पहुंचे थे। इनमें 855 नए मरीज थे, जो विभिन्न विभागों में अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे। 91 मरीज ऐसे थे, जिन्होंने तीन माह पहले ही रिम्स की ओपीडी में परामर्श लिया था और दोबारा फॉलोअप के लिए पहुंचे थे।

फॉलोअप में भी सबसे ज्यादा 17 मरीज मेडिसिन, 11 मरीज यूरोलॉजी, 9 न्यूरोलॉजी समेत अन्य दूसरे विभाग में पहुंचे। 946 मरीजों में 30 प्रतिशत मरीज ऐसे थे, जिन्हें सांस की समस्या थी। इनमें पोस्ट कोविड के मरीज थे और कई ऐसे सामान्य मरीज भी थे, जिन्हें पता नहीं चला कि अचानक उन्हें सांस लेने की समस्या कैसे हो गई।

डॉक्टर बोले… मानसिक समस्या और थकान की भी है शिकायत

मेडिसिन ओपीडी खुलने के बाद मरीजों के लिए काफी राहत हो गई। कई छोटी बीमारियां सर्दी-खांसी, बुखार आदि पर दो माह से चिकित्सीय परामर्श बंद था। बुधवार से अोपीडी खुलने के बाद 154 मरीज सिर्फ मेडिसिन ओपीडी में पहुंचे। ओपीडी में उपस्थित डॉक्टर के अनुसार, 60% मरीज मामूली सर्दी-खांसी, बुखार आदि की समस्या लेकर पहुंचे थे। बाकी 40% रोगी ऐसे थे, जो कोविड से रिकवर हो चुके थे। लेकिन, उन्हें पाेस्ट काेविड की समस्या जैसे- सांस लेने में तकलीफ, मानसिक समस्या, थकान, बदन दर्द आदि लेकर पहुंचे थे। हालांकि, उनमें पोस्ट कोविड के गंभीर लक्षण तो नहीं थे, लेकिन पोस्ट कोविड की बीमारी को लेकर संदेह था। परामर्श के बाद वैसे मरीजों को दो-तीन तरह की जांच की सलाह दी गई। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोबारा ओपीडी में आने को कहा गया है। डाॅ. विद्यापति की यूनिट के चिकित्सक ने बताया कि कुछ मरीज जो ब्लड से संबंधित रिपोर्ट लेकर पहुंचे थे, उनमें करीब 10% मरीज में खून मोटा मिला।

जांच… सर्जरी ओपीडी में 56, कैंसर में 8, शिशु आ गायनी ओपीडी में 50 से ज्यादा मरीज पहुंचे

रिम्स के सर्जरी ओपीडी में 56 मरीज पहुंचे थे। इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार इनमें से कुछ मरीज ऐसे थे, जिनकी पूर्व में ऑपरेशन की गई थी। लेकिन, ओपीडी बंद रहने के कारण फॉलोअप के लिए नहीं पहुंच सके थे। ओपीडी में इलाज के दौरान दर्जन भर मरीज ऐसे थे, जिन्हें गोल ब्लाडर समेत कई तरह की सर्जरी होनी है। सभी को जांच कराने के बाद अगले सप्ताह आने के लिए कहा गया है। इधर, एक बजे से पहले गायनी ओपीडी में 51 मरीज परामर्श ले चुके थे। 15 मरीज गर्भवती थी, जो डॉक्टरी परामर्श के लिए पहुंची थीं। इन्हीं में कुछ ऐसे भी थे, जो पूर्व में कोविड पॉजिटिव हो चुके थे। उन्हें संदेह था कि बच्चे को किसी प्रकार की समस्या न हो।

चेस्ट एक्सरे की सलाह… फेफड़े में संक्रमण का संदेह लोगों में ज्यादा

रिम्स के टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या 15 रही। यहां भी मरीज सांस की समस्या, खांसी और चेस्ट में इंफेक्शन के संदेह पर पहुंचे थे। हरमू से इलाज के लिए पहुंचे मरीज कृष्णमुरारी ने बताया कि दो माह पहले वे कोरोना की चपेट में आए थे। तब उनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 68 से 75 के बीच पहुंच गया था। एचआरसीटी में स्कोर 18 था। ठीक होने के बाद भी लगातार सांस लेने में परेशानी हो रही है। रिम्स आने के बाद डॉक्टर ने सांस के लिए एक्सरसाइज करने और चेस्ट एक्सरे कराने की सलाह दी है। विभाग के एचओडी डॉ. ब्रजेश मिश्रा ने बताया कि कई मरीजों में कोरोना से ठीक होने के बाद भी लक्षण रह जा रहे हैं। यह ठीक होने के चार से छह सप्ताह के बाद अपना असर दिखाना शुरू कर रहा है। फॉलोअप में आए कई मरीजों के फेफड़े में संक्रमण ठीक होने के बाद भी देखने को मिला है।

 

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