
नई दिल्ली। मानसून सत्र के दौरान आज कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। इसके साथ ही उन्होंने सरकार के स्वच्छ भारत मिशन, मेक इन इंडिया और कनेक्ट इंडिया पर भी जमकर करारा वार किया। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले एनडीए सरकार का हैप्पी बर्थ डे मनाने वाली सरकार महंगाई जैसे मुद्दे को कहीं पीछे छाेड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नाक के नीचे दालों की चोरी हो रही है, लेकिन पीएम इस पर कुछ नहीं बोलते हैं।
राहुल ने 16 फरवरी 2014 को पीएम द्वारा हिमाचल में चुनावी कैंपेन में किए गए वादों की याद दिलाते हुए कहा कि ‘पीएम ने वादा किया था कि मां-बच्चे रात-रात भर रोते हैं, आंसू पीकर सोते हैं। 2014 में जब हमारी सरकार आएगी, तो मंहगाई थम जाएगी। 2 महीने पहले एनडीए का जन्मदिन था, जो बड़ी धूमधाम से देश भर में बनाया गया। पीएम ने भाषण देकर अपनी तमाम योजनाएं गिनाई।
यहां तक कि पार्टी के सभी नेताओं के देशभर में उपलब्धियां गिनाने को भेजा। जो कि सारी योजनाएं निराधार हैं। मेक इन इंडिया से एक भी युवा को रोजगार नहीं मिला। दाल, टमाटर और आलू के दाम के दाम पर पीएम लगाम नहीं लगा सके। दाल और बाकी की चीजों के दाम पर कंट्रोल करने पर झूठ नहीं बोला जा सकता है। जैसा कि उन्होंने अपने झूठी योजनाओं के बारे में बोला है। मैं दाल का मुद्दा नहीं उठाना चाहता, मेरा मतलब तो उसके पीछे हो रही चोरी से है।
केंद्र को दालों की बढ़ती कीमत घेरते हुए उन्होंने कहा कि यूपी की रैलियों में पीएम मोदी ने बार-बार लोगों से आग्रह किया कि वह प्रधानमंत्री नहीं बल्कि एक चौकीदार हैं जो किसी सूरत से भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे। लेकिन अब उनकी ही नाक के नीचे दालों की चाेरी हो रही है। उन्होंने कहा कि आज वह बड़े आदमी हैं देश के प्रधानमंत्री हैंं, लिहाजा अब वह चौकीदार नहीं हैं। इसलिए यह काम कांग्रेस कर रही है।
जैसा कि पिछले साल एनडीए ने उद्योगपतियों का बड़ा कर्जा माफ किया है। वैसे ही 2008 में हमारे समय में जब दुनिया भर में मंदी चल रही थी, तब मनमोहन सिंह पीएम थे और उन्होंने तब किसानों का 70 हजार करोड़ का कर्जा माफ किया था। जब 2008 में कच्चे तेल का दाम 110 डॉलर प्रति बैरल था और अब 44 डालर प्रति बैरल कच्चे तेल का रेट है। दोनो रेट मिला लीजिए। हमने 45 रूपए एमएसपी पर किसानों से दाल ली थी।
जिसका बाजार रेट 75 रूपए था। इन्होंने 50 रूपए पर किसानों से दाल ली और बाजार में 180 में दिया। हमने 30 रूपए का अंतर रखा था। इन्होंने 130 का रखा है। बीच के 100 रूपए कहां जा रहे हैं। इसका हिसाब कौन देगा। 2 लाख करोड़ खर्ज किए हैं, इसमें से किसानों को कितना दिया है। मैं सरकार से वो तारीख पूछना चाहता हूं, जब वो आकर दाल का दाम कम करेंगे।