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मालेगांव ब्लास्ट केस : कर्नल पुरोहित को मिली जमानत, 9 साल बाद होंगे रिहा

साल 2008 मालेगांव ब्लास्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को जमानत दे दी है। पुरोहित की ज़मानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। पुरोहित 9 साल से जेल में बंद थे। इससे पहले इसी साल 25 अप्रैल को बॉम्बे हाई कोर्ट ने कर्नल पुरोहति की जमानत याचिक रद्द कर दी थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अर्जी दी गई थी। वहीं ब्लास्ट की दूसरी आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह को बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी।

बता दें कि इस मामले की जांच पहले एटीएस के पास थी, जिसके बाद जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई। एनआईए ने साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चिट दी थी, जबकि कर्नल पुरोहित की बेल का विरोध किया था। एनआईए का मानना है कि जो आरोप पुरोहित के खिलाफ हैं वो गंभीर प्रकृति के हैं। एनआईए का मानना है कि कर्नल पुरोहित को बेल मिलने का ये सही समय नहीं है। पिछली सुनवाई में पुरोहित की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने दावा किया था कि वो सेना की इंटेलिजेंस यूनिट के लिए काम कर रहे थे। इसी मकसद से वो ब्लास्ट के आरोपी संगठन अभिनव भारत की बैठक में शामिल हुए थे, लेकिन बाद में राजनीतिक कारणों से उन्हें धमाके का आरोपी बना दिया गया।

क्या था मामला ?
दरअसल, 29 सितंबर, 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए ब्लास्ट में 6 लोग मारे गए थे, जबकि 79 लोग गंभीर रुप से घायल हुए थे। इस मामले में दायर की गई चार्जशीट में 14 आरोपियों के नाम थे। ब्लास्ट के लिए आरडीएक्‍स देने और साजिश रचने के आरोप में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल प्रसाद पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया गया था।

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