उत्तर प्रदेश

मुनीर के स्कूल बैग में किताबों से ज्यादा होती थीं हथियार और गोलियां

एजेन्सी/  muneer_1460056324पूर्वांचल में कुख्यात अपराधी रहे श्रीप्रकाश शुक्ला ने 2000 के दशक में जिस तेजी के साथ ताबड़तोड़ वारदातों कीं थीं, ठीक उसी तरह वेस्ट यूपी में हिस्ट्रीशीटर मुनीर अपराध की दुनिया का बड़ा नाम बन गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस, एटीएस, एसटीएफ समेत कई एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं। लेकिन ये कुख्यात अपराधी सभी को छका रहा है। अलीगढ़ में कारोबारी फहद और छात्र नेता आलमगीर की हत्या में मुनीर नामजद रहा। लेकिन पुलिस उसे पकड़ने में कभी कामयाब नहीं हो पाई।

सूत्रों की माने तो उसने वेस्ट यूपी में अपना पूरा गैंग खड़ा कर लिया है। बड़े-बड़े गिरोह के अपराधी अपने गिरोह से नाता तोड़कर मुनीर के साथ जुड़ चुके हैं। जो वेस्ट यूपी में लूट, हत्याएं और फिरौती, नकली करेंसी जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

नेशनल जांच एजेंसी के डिप्टी एसपी तंजील अहमद की हत्या में जिस मुनीर का नाम सामने आ रहा है। वह भी मूलरूप से डीएसपी तंजील के पैतृक गांव सहसपुर का ही निवासी है। बारहवीं तक की पढ़ाई मुनीर ने स्योहारा के एक इंटर कालेज से की थी। 

जानकारों की मानें तो मुनीर बचपन से ही आपराधिक प्रवृत्ति का रहा है। स्योहारा में पढ़ाई के दौरान छात्रों के बीच हुए झगड़े में भी मुनीर ने गोली चलाई थी। लेकिन मुकदमेबाजी न होने के कारण मुनीर वहां से बच निकला था। बारहवीं की परीक्षा में नकल करने से रोकने पर एक टीचर पर तमंचा तान दिया था। इसके बाद वह अलीगढ़ चला गया था। यहां उसने एएमयू में छात्रों के बीच रहकर अपनी पैठ बनाई। यहां उसके बैग में किताबों से ज्यादा हथियार और कारतूस रहते थे। मामूली विवाद में भी ताबड़तोड़ फायर कर देता था।

उसने अलीगढ़ में कारोबारी फहद की हत्या में वह नामजद था। लेकिन पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई। बाद में सहारनपुर के आलमगीर की हत्या में उसका नाम चर्चा में आया था। अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बन चुके मुनीर पर पुलिस पचास हजार का इनाम घोषित किया है। पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की माने तो ऐसे अपराधी पर तो पचास हजार रुपये का इनाम भी कम है। उत्तर प्रदेश पुलिस, एटीएस, एसटीएफ समेत कई एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं। लेकिन मुनीर किसी के हाथ नहीं लग पा रहा है।

अपराधी तक पहुंचने और घटना का खुलासा करने में पुलिस अपने जिस हथियार सर्विलांस का इस्तेमाल करती है। मुनीर इस हथियार का भी मास्टर है। ये ही वजह रही है कि वह अपराध करने के बाद पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। अपराध की दुनिया में आने के बाद वह परिवार के संपर्क में भी कम ही रहा है। पकड़े गए उसके साथियों ने पुलिस को बयान दिया है कि मुनीर घटना के बाद मोबाइल और सिम फेंक देता है। इसके बाद वह नया सिम और मोबाइल खरीद लेता है। जिस कारण पुलिस उसे ट्रेस नहीं कर पाती है। पुलिस ने मुनीर के जिन नंबरों की कॉल डिटेल निकाली है। वह सहसपुर के गर्द गिर्द ही बंद हो गए थे। जिसके बाद वह दोबारा नहीं खुले।

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