लखनऊ

यहां लग्जरी गाड़ियों से आते अपराधी, खूब करते अय्याशी

sex-racket_1460132260एजेन्सी/  चारबाग स्टेशन पर एनईआर चौकी के पास जीआरपी के सिपाही आफाक अहमद को पूछताछ करने व तलाशी लेने पर गोली मार देने वाले बदमाशों रोहित दुबे व अमित पांडेय ने पूछताछ में कबूला कि उन्होंने गोसाईगंज इलाके में ओमैक्स रेजीडेंसी के फ्लैट नंबर 603 में अड्डा बना रखा है।

ओमैक्स रेजीडेंसी के ऑर्चिड सी-603 अपराधियों के लिये मुफीद अड्डा था। बड़ी-बड़ी अपराधिक वारदातों को अंजाम देने के बाद अपराधी यहां शरण लेने आते थे। बाहुबली मंत्री  और विधायक से कनेक्शन होने के चलते किसी की हिम्मत नहीं थी कि इस फ्लैट में आने-जाने वालों से कोई सवाल पूछ सके।

देर रात तक पार्टियां और शराब पीने के बाद हंगामा करने पर भी कोई उनकी शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।

गेट पर सिक्योरिटी गार्डों ने बताया कि फ्लैट नंबर 603 में रहने वाले प्रधान विक्रम सिंह सपा का झंडा लगी काले शीशे वाली सफारी गाड़ी से चलते थे। इनसे मिलने वाले भी सपा का झंडा लगा गाड़ियों से ही आते थे।

लग्जरी गाड़ियां और सपा का झंडा लगा होने के नाते कोई उन्हें रोकने-टोकने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। पिछले तीन-चार महीने से उन लोगों का आना-जाना अधिक था।

ओमेक्स रेजिडेंसी अपार्टमेंट से पकड़े गए सुल्तानपुर के ग्राम प्रधान विक्रम सिंह और अमित के बीच करीब दो साल से संबंध थे। दोनों की मुलाकात सुल्तानपुर जेल में बंद संसार सिंह ने कराई थी। उसने कहा था कि प्रधानी के चुनाव में अमित काफी मददगार साबित होगा।

अमित ने अपनी भूमिका को बखूबी निभाया भी। उसने चुनाव में रुपया खर्च करने के लिए लूटपाट की कुछ वारदातें कीं और वोटरों को डराया-धमकाया। विक्रम ने बताया कि 2012 में उसके फूफा राममोहन सिंह की दद्दन सिंह ने हत्या कर दी थी।

कुछ महीने बाद ही फुफेरे भाइयों ने दद्दन सिंह को मौत के घाट उतार दिया। फुफेरे भाइयों ने हत्या के वक्त उसकी कार का इस्तेमाल किया था। इसलिए वह भी नामजद हो गया।

पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जहां हत्या के आरोप में आठ साल से बंद अंबेडकरनगर के संसार सिंह से मुलाकात हुई। 13 महीने बाद विक्रम जमानत पर छूटा तो उसने संसार सिंह से प्रधानी का चुनाव लड़ने की बात कही। तब संसार सिंह ने अमित को उसके पास भेजा था।

इसके बाद से अमित और विक्रम के बीच गहरी मुलाकात हो गई। विक्रम ने बताया कि ओमेक्स के जिस फ्लैट में वह ठहरता है, वह फूफा राममोहन सिंह ने बुआ सरिता के नाम से खरीदा था।

किसी बड़े गैंग से जुड़े हो सकते हैं तार

चारबाग स्टेशन पर एनईआर चौकी के सामने ताबड़तोड़ फायरिंग करके जीआरपी के सिपाही को घायल करने वाले बदमाशों के किसी बड़े गैंग से तार जुड़े होने और शहर की अन्य संगीन वारदातों में उनके हाथ का अंदेशा है।

जीआरपी के अधिकारियों के साथ क्राइम ब्रांच व पुलिस के अन्य अधिकारियों ने दोनों बदमाशों व उनके साथियों से गहन पूछताछ की। सभी का कॉल डिटेल खंगाला जा रहा है।

जीआरपी की टीम ने पिस्टल समेत हत्थे चढ़े रोहित दुबे व अमित पांडेय से पूछताछ के साथ राजधानी के पुलिस अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। एएसपी क्राइम डॉ. संजय कुमार अपनी टीम के साथ जीआरपी थाने पहुंचे।

इसके साथ सीओ कैसरबाग अभयनाथ त्रिपाठी व एसओ नाका धीरेंद्र कुमार यादव ने भी बदमाशों से गहन पूछताछ की।

विकासनगर में मुन्ना बजरंगी के साले पुष्पजीत सिंह व उसके दोस्त को सरेराह गोलियों से भूनने, गोमतीनगर में विज्ञापन कंपनी के एग्जीक्यूटिव रीतेश अवस्थी को सरेराह गोली मारकर हत्या व अन्य संगीन वारदातों से कड़ी जुड़ने की उम्मीद के चलते दोनों से गहन पूछताछ की।

चारबाग स्टेशन पर संदिग्ध हालात में चक्कर काट रहे रोहित और अमित ने पूछताछ कर रहे जीआरपी के कांस्टेबल आफाक से खुद को सुल्तानपुर के एक एमएलसी का भतीजा बताकर अर्दब में लेने की कोशिश की।

इसके बावजूद तलाशी लेने पर फायरिंग करने लगे। इसमें आफाक गंभीर रूप से घायल हो गया।

इंस्पेक्टर जीआरपी ने कहा कि अमित ने एमएलसी व एक अन्य कद्दावर व्यक्ति का नाम लिया था। दोनों से उसके संबंधों की पुष्टि नहीं हुई है। 

फैजाबाद में लूट व महिला के साथ अश्लीलता के मुकदमे में फरार अमित पांडेय अपने दोस्त रोहित दुबे के साथ मौजमस्ती के इरादे से निकले थे। पसंदीदा कॉलगर्ल की तलाश में स्टेशन परिसर में चक्कर काट रहे थे।

जीआरपी के सिपाही आफाक अहमद ने टोका और तलाशी लेनी चाही तो बदमाशों ने दुस्साहसिक वारदात अंजाम दे डाली। हत्थे चढ़े बदमाशों ने कुबूला कि वह ही नहीं अनेक अपराधी चारबाग में मौजमस्ती करने आते हैं।

कई वारदात अंजाम दे चुके रोहित दुबे ने जीआरपी की पूछताछ में खुलासा किया कि कुर्की का नोटिस जारी होने से अमित पांडेय काफी परेशान था। इस पर दोनों लोग मौजमस्ती के इरादे से चारबाग आए थे।

बीयर पीने के बाद पसंदीदा कॉलगर्ल की तलाश में भटक रहे थे। वह अक्सर एनईआर के पूछताछ काउंटर से लेकर सामने स्थित डिवाइडर के बीच मिलती थी। उसे कभी होटल में ले जाता था तो कभी अपने ठिकाने पर ले जाता था। कई चक्कर काटने पर जीआरपी के दरोगा व सिपाही को शक हो गया।

 
 

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