यहां लड़कों के लिए तरस रही हैं लड़कियां, बोलीं- हमारी किस्मत ही खराब है

हमारे बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि शादी सिर्फ दो इंसानो का ही मिलन नहीं होता हैं बल्कि दो परिवार भी मिलते हैं और इसी वजह से माता पिता अपने बच्चो की आने वाली जिंदगी के लिए एक अच्छा इंसान ही ढूढ़ा करते हैं ।
दुनिया में सबसे खास रिश्ता माना जाता है पति-पत्नी के रिश्ते को शादी एक ऐसा खूबसूरत एहसास है जिसके सुखद अनुभवों से हम सब को ही गुजरना पड़ता है। शादियों को लेकर भारत बहुत सारी मान्यताएं हैं।
ब्राजील के इस कस्बे की कहानी ग्रीक की मशहूर कहानियों जैसी है, जहां पहाड़ियों के बीच एक छोटा-सा गांव “Noiva do Cordeiro” है और यहां रहने वाली खूबसूरत महिलाओं की एक अदद प्यार की तलाश पूरी नहीं हो रही। करीब-करीब यही सच्चाई ब्राजील के इस नोइवा दो कोरडेएरो कस्बे की भी है।
बता दे की इस गांव में करीब 600 महिलाए हैं जो की अविवाहित पुरुष की तलाश में हैं लेकिन इनकी ये तलाश सधुरी ही रह जाती हैं । यहां के पुरुष काम के लिए शहरों में रह रहे हैं, जबकि पूरे कस्बे की जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर है।
कस्बे की 600 महिलाओं में ज्यादातर की उम्र 20 से 35 साल के बीच है। यहां रहने वाली नेल्मा फर्नांडिस के मुताबिक, कस्बे में शादीशुदा मर्द हैं या फिर कोई रिश्तेदार। इनमें से ज्यादातर रिश्ते में भाई लगते हैं। कस्बे में रहने वाली लड़कियों का कहना है कि वे सभी प्यार और शादी का सपना देखती हैं, लेकिन यह कस्बा नहीं छोड़ना चाहती हैं। वे शादी के बाद भी यहीं रहना चाहती हैं। वे चाहती हैं कि शादी के बाद लड़का उनके कस्बे में आकर वहीं के नियम-कायदों को मानते हुए रहे।
गांव में कुछ महिलाये शादी शुदा हैं लेकिन उनके 18 वर्ष के बेटे और उनके पत्नी शहर में पैसा कमाने के लिए गए हुए हैं और इस वजह से यहां पर खेती किसानी से लेकर हर काम महिलाओ के जिम्मे ही हैं ।कम्युनिटी हॉल के लिए टीवी खरीदने से लेकर हर तरह का प्रोग्राम ये मिल-जुलकर करती हैं। इस कस्बे की पहचान मजबूत महिला समुदाय की वजह से है। इसकी स्थापना मारिया सेनहोरिनहा डी लीमा ने की थी, जिन्हें कुछ वजहों से 1891 में अपने चर्च और घर से निकाल दिया गया था।
करीब 600 महिलाओ वाले इस गांव में बिना शादी किये हुए लड़को का मिलना नामुमकिन हैं और लड़किया शादी करने के लिए यहाँ पर तरसती रह जाती हैं ।बता दे की यहाँ पर कुंवारे लड़के ना मिलने का ये आलम हैं की यहाँ की लड़किया को जिंदगी भर कुंवारी ही रहना पड़ जाता हैं और पूरी जिंदगी बिना शादी किये बिताती हैं ।
वहीं अगर इस गांव में जनगणना के अनुसार कस्बे की महिलाओं में ज्यादातर की उम्र 20 से 35 साल के बीच है। कस्बे में रहने वाली लड़कियों का कहना है कि वो भी प्यार और शादी के सपना देखती हैं। शायद ये भी एक बड़ा कारण है इन्हें लड़का न मिलने का। हालांकि, वो इसके लिए कस्बा नहीं छोड़ना चाहती हैं क्योंकि वो शादी के बाद भी यहीं रहना चाहती हैं। यहां महिलाओं की आबादी करीब 600 है जिनमें से 300 से ज्यादा कुवारी लड़कियों की शादी नहीं हो पाई है।
इस गांव की एक विशेष बात ये भी है कि यहां के पुरूष खेती-किसानी नहीं करते हैं बल्कि इस गांव में ये काम भी स्वयं महिलाएं ही करती हैं क्योंकि ज्यादातर महिलाओं के पति या बालिक बेटे गांव से दूर शहर मे रहते हैं। बताया जाता है कि इस कस्बे की पहचान मजबूत महिला समुदाय की वजह से है। इसकी नींव मारिया सेनहोरिनहा डी लीमा ने रखी थी, जिन्हें कुछ वजहों से 1891 में अपने चर्च और घर से निकाल दिया गया था।