राज्य

राजस्थान : जाट आंदोलन खत्म, राजस्थान सरकार के साथ सफल रही बातचीत

राजस्थान : राजस्थान के भरतपुर में विगत 22 जून से ओबीसी में आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे जाट आंदोलन को सरकार के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद जाट नेताओं ने आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा कर दी है| जाट नेताओं की ओर से कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह और जाट संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह शामिल हुए| वहीं सरकार की तरफ से समाज कल्याण विभाग के निदेशक समित शर्मा, संभागीय आयुक्त सुबीर कुमार, जिला कलेक्टर नरेंद्र कुमार गुप्ता, आईजी आलोक वशिष्ठ सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर बातचीत में शामिल हुए| बता दें कि आंदोलन के चलते ट्रेन और यातायात पर काफी असर पड़ा| निजामुद्दीन कोटा स्पेशल एक्सप्रेस को रद्द कर दिया गया था| साथ ही कोटा-पटना एक्सप्रेस और दो अन्य ट्रेनों को मथुरा से चलाया गया|
इससे पहले शुक्रवार को राजस्थान के भरतपुर में आरक्षण को लेकर जाटों ने जिले के सभी रेल और सड़क मार्गों पर चक्का जाम शुरू कर दिया| भरतपुर-धौलपुर के जाट ओबीसी में आरक्षण की मांग को लेकर पिछले दो वर्षों से आंदोलनरत है, जिसके तहत उन्होंने करीब 15 दिन पहले सरकार को 23 जून से चक्का जाम करने की चेतावनी दे दी थी| हालांकि एक दिन पहले ही सरकार पर धोखाधड़ी का आरोप लगाकर कांग्रेस विधायक और भरतपुर के पूर्व राजा विश्वेन्द्र सिंह के नेतृत्व में अलवर-मथुरा रेलवे मार्ग पर बहज गाँव में जाम लगा दिया| जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह के अनुसार दोनों जिले के जाटों को ओबीसी में आरक्षण की अधिसूचना सरकार को शीघ्र ही जारी करनी चाहिए| जब तक यह फैसला नहीं हो जाता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा|
आंदोलन की वजह
राजस्थान में धौलपुर और भरतपुर के जाटों को छोड़कर सभी जिलों के जाटों को आरक्षण मिला हुआ है| इन्हें इस आधार पर नहीं मिला था कि इन जिलों में जाट राजघराना रहा है| धौलपुर के जाट राजघराने की पूर्व महरानी तो खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे हैं| मगर धौलपुर में जाटों की संख्या न के बराबर है, इसलिए सारा आंदोलन भरतपुर में हो रहा है| 2002 में तत्कालीन गहलोत सरकार ने इन जिलों के जाटों को भी राज्य सरकार में आरक्षण दे दिया था, मगर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी|

Related Articles

Back to top button