
लखनऊ। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की राह इस बार उनके परंपरागत गढ़ अमेठी में आसान नहीं दिख रही है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जहां वे जुट गए हैं इस बात के पर्याप्त संकेत मिल रहे हैं कि आम आदमी पार्टी (आप) के यहां कूदने से कांग्रेस का चुनावी आकलन गड़बड़ाने लगा है। इसके अलावा कांग्रेस के भीतर भी घमासान है और उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी (सपा) अपना दोस्ताना चेहरा छुपाकर प्रतिद्वंद्विता दिखाने पर अमादा है। राहुल के समर्थक हालांकि खुले तौर पर इस बात को स्वीकार नहीं कर रहे लेकिन इस बात के पर्याप्त सबू हैं कि यहां से आप प्रत्याशी बनने को तैयार बैठे कुमार विश्वास के कारण उनकी पेशानी पर चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं। दो बार सांसद रह चुके राहुल ने पिछले सप्ताह न केवल अमेठी के लोगों के साथ अत्मीयता दिखाई बल्कि महिलाओं को अपने एसयूवी में अहमियत देने का वादा भी किया। इतना ही नहीं पहले जिन स्थानीय पत्रकारों को राहुल की सुरक्षा में तैनात विशेष सुरक्षा दस्ता दूर खदेड़े रहता था उन्हें इस बार खास तवज्जो दी गई। कारवां यहीं नहीं थमा नई दिल्ली पहुंचने के बाद राहुल ने अपने पारिवारिक मित्र और केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री आस्कर फर्नांडीज को अमेठी भेज कर क्षेत्र में सड़की हालत का आकलने करने को कहा। फर्नांडीज को ‘रखरखाव के उपाय करने’ के लिए भी कहा। यह कदम तब उठाया गया जब अमेठी में राहुल को कई जगहों पर काले झंडे दिखाए गए। निकट सहयोगी और स्थानीय कांग्रेस नेताओं का मानना है कि आप के कूद पड़ने के बाद से चुनावी लड़ाई का समीकरण बदल गया है।
कांग्रेस के एक कार्यकर्ता ने आईएएनएस को कुमार विश्वास की ओर इशारा करते हुए कहा कि हम ‘हम उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते।’ कुमार विश्वास क्षेत्र में विकास के मुद्दों को हवा देने में जुटे हैं।