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लीव नहीं मिल रही थी इस लेडी IAS को, फेसबुक पर लिखने के बाद हुआ ग्रांट

रांची (झारखंड)। यहां की लेडी आईएएस और पंचायती राज सेक्रेटरी वंदना डाडेल ने चाइल्ड केयर लीव नहीं मिलने से परेशान होकर फेसबुक पर कई सवाल लिखे थे। इसके बाद वो चर्चा में आईं और उन्हें लीव मिल गई। वंदना इससे पहले भी धर्म परिवर्तन पर पोस्ट लिख चुकी हैं जिसके बाद उन्हें सरकार ने नोटिस भेजा था।क्या लिखा था फेसबुक पर …
लीव नहीं मिल रही थी इस लेडी IAS को, फेसबुक पर लिखने के बाद हुआ ग्रांट
 
– वंदना डाडेल ने आइएएस एसोसिएशन ग्रुप में पोस्ट कर पूछा था कि क्या सरकार मेरी लीव एप्लिकेशन को लंबे समय तक पेंडिंग रख सकती है? इसके बाद स्टेट गर्वमेंट हरकत में आई और गुरुवार को उनकी लीव एप्रूव हो गई। सरकार ने उन्हें 23 मई से 10 जून तक की छुट्टी दी है।
– आईएएस ने लिखा था, “मेरा एप्लिकेशन न रिजेक्ट होता है, न ही एक्सेप्ट। बार-बार मुझे एप्लिकेशन पर पुनर्विचार करने को कहा जा रहा है। ऐसे में मेरे पास एप्लिकेशन एक्सेप्ट हुए बिना लीव पर चले जाने के लिए क्या-क्या लीगल ऑप्शन हैं। “

– चार मई की रात 11.30 बजे किये गये अपने पोस्ट में लेडी आईएएस ने लिखा, ” मैंने फरवरी में ही मई और जून महीने में 25 दिन की छुट्टी के लिए एप्लिकेशन दिया था।” इस पोस्ट के जवाब में कई आइएएस अफसरों ने उन्हें सेंट्रल एडमिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) जाने का सुझाव दिया है।
– राज्य के एक्स चीफ सेक्रेटरी शिव बसंत के लेडी आईएएस के पोस्ट पर कमेंट किया था। उन्होंने इसे पर्सनली नहीं लेने की सलाह दी। मामला सुलझाने के लिए कार्मिक सचिव निधि खरे से मिलने की सलाह दी।
 
– इस पर लेडी आईएएस ने उन्हें थैंक्स देते हुए जवाब भी लिखा। इसके बाद उन्होंने लिखा कि मेरी लीव एप्लिकेशन इससे पहले भी कई बार रिजेक्ट हो चुकी है। इसके लिए चीफ सेक्रेटरी तक से मिली, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
 
पहले भी सरकार से मिल चुका है नोटिस, मिली थी चेतावनी
 
– आईएएस वंदना डाडेल को सोशल मीडिया पर राज्य सरकार के विरुद्ध टिप्पणी करने के लिए इससे पहले भी नोटिस मिल चुका है। अक्तूबर 2016 में उन्होंने धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर फेसबुक पर लिखा था। इसके बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया था। फिर उन्हें चेतावनी देते हुए कहा गया था कि वे दुबारा ऐसी हरकत न करें।
 
– वंदना ने पिछले साल अक्टूबर में फेसबुक पर लिखा था, ” जब सरकारी कार्यक्रमों में भी आदिवासियों के धर्म और धर्म परिवर्तन पर टिप्पणी होने लगे तो कई सवाल उठना वाजिब है। क्या इस राज्य में आदिवासी को स्वेच्छा से अपना धर्म चुनने का भी अधिकार नहीं रह गया है? आखिर क्यों अचानक आदिवासियाें के धर्म पर औरों को चिंता होने लगी है, जबकि अशिक्षा, बेरोजगारी, कुपोषण जैसी कितनी ही गंभीर समस्याओं से मेरा समाज जूझ रहा है।”
 
– इससे पहले भी वंदना डाडेल ने अपनी पोस्टिंग को लेकर फेसबुक पर दुख जताया था। खुद के आदिवासी होने के कारण सरकार पर बार-बार ट्रांसफर के आरोप लगाए थे।

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