
नई दिल्ली: देश को तानाशाही से बचाने के लिए पार्टी की आंतरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था की जरूरत पर बल देते हुए भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने चेतावनी दी कि अगर सत्ता किसी व्यक्ति विशेष के पास केंद्रित होगी, तो इससे देश में आपातकाल की स्थिति पैदा होगी और लोगों को आह्वान किया कि इसी बात को ध्यान में रखते हुये उन्हें हमेशा विचारधारा के पक्ष में वोट करना चाहिए न कि किसी व्यक्ति के पक्ष में। दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में 1975 में लगाये गये आपातकाल के 4० साल पूरे होने पर आज आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि वे लोग सम्मानीय हैं, जिन्होंने आपातकात के खिलाफ आवाज उठायी और उन्होंने ही यह सुनिश्चित भी किया कि उसके बाद कोई दूसरा भविष्य में इस गलती को दोहराने की हिम्म्त न करे।
शाह का यह बयान भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के कुछ दिन पहले दिये गये तानाशाही और आपातकाल संबंधी बयान के परिप्रेक्ष्य में अधिक महत्वपूर्ण है। आडवाणी ने इस बात की आशंका जतायी थी कि आपातकाल को लागू करने वाली शक्तियां फिर मजबूत हो गयी हैं। शाह ने कहा कि जिन पार्टियों में आतंरिक लोकतंत्र नहीं है, वे पार्टियां देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा नहीं कर सकती। आपातकाल अध्यादेश से लागू नहीं किया जा सकता है बल्कि यह तानाशाही की मानसिकता की उपज है। विपक्ष के दृष्टिकोण को नजरअंदाज करना और सत्ता हथियाने की मानसिकता की वजह से ही आपातकाल की स्थिति पैदा होती है।