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विचाराधीन कैदियों के परिजनों का आरोप- जेल में हो रहा उत्पीड़न, NHRC को सौंपा ज्ञापन

भोपाल जेल ब्रेक के बाद वहां बंद कुछ संदिग्ध विचाराधीन बंदियों को प्रताड़ित किया जा रहा है. आरोप है कि सिमी के संदिग्ध सदस्य बताकर उन पर जुल्म किए जा रहे हैं. ये वहीं संदिग्ध हैं, जिनके आठ साथियों को भोपाल पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में जेल से भागने के आरोप में मार गिराया था. अब जेल में बंद विचाराधीन बंदियों के परिजनों ने इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से इंसाफ की गुहार लगाई है.

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विचाराधीन कैदियों के परिजनों का आरोप- जेल में हो रहा उत्पीड़न, NHRC को सौंपा ज्ञापन

बंदियों के परिजनों ने आयोग से लगाई गुहार
भोपाल की जेल में ऐसे 21 विचाराधीन बंदी हैं, जिन पर प्रतिबंधित संगठन सिमी के सदस्य होने का आरोप है. इसलिए उनके खिलाफ अदालतों में कई तरह के मामले चल रहे हैं. इन बंदियों के परिजनों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि 31 अक्टूबर 2016 की रात भोपाल में जेल ब्रेक हुआ था, जिसके बाद आठ विचाराधीन कैदी पुलिस के हाथों मारे गए थे. लेकिन बाकि बचे बंदियों का जेल में बहुत ज्यादा उत्पीड़न किया जा रहा है.

 जेल में 21 बंदियों का उत्पीड़न
परिजनों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि इस घटना के बाद शेष बचे 21 बंदियों को जेल में लगातार शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है. इस बात की शिकायत निरंतर न्यायलय के समक्ष की जाती रही है, लेकिन इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई. और न ही उत्पीड़न की स्थिति में कोई सुधार हुआ है.

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विचाराधीन बंदियों पर बयान
आयोग को दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सार्वजनिक मंच से जेल में बंद इन विचाराधीन कैदियों को आतंकवादी बताया और पुलिस के हाथों मारे गए आठ बंदियों की मौत को उचित ठहराया गया. इस तरह से सिमी के सदस्य होने के आरोप में बंद कैदियों को प्रताड़ित करने के लिए जैसे हरी झंडी दे दी गई है.

आए दिन होती है मारपीट
ज्ञापन में बिंदुवार तथ्यों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 26 अप्रैल 2017 को इकरार नामक बंदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सत्र न्यायलय को दिए गए एक बयान में बताया कि जेल ब्रेक की घटना के बाद जेल अधिकारी आए दिन उनके साथ मारपीट करते हैं. उस बंदी ने अदालत को बताया कि इस पिटाई की वजह से उसके सिर, जांघो और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोट के निशान हैं.

शिकायत करने पर मारने की धमकी
विचाराधीन बंदी इकरार ने अदालत को बयान देते हुए कहा कि जेल में जबरन उनकी दाढ़ी काट दी जाती है. उनसे उनके धर्म विरोधी नारे लगवाए जाते हैं. कैदी ने बयान में कहा कि उन्हें शंका है कि जेल अधिकारियों की शिकायत करने पर उन्हें मार दिया जाएगा और उनकी मौत को खुदकुशी करार दे दिया जाएगा. इस बयान के बाद इकरार के वकील ने उसी दिन एक आवेदन भी अदालत के समक्ष दिया था.

सत्र न्यायलय को दिया था शपथपत्र
ज्ञापन में उल्लेख है कि जेल में बंद विचाराधीन कैदी इकरार और अबू फजल से मिलने के लिए उनके रिश्तेदार इनामुर्रहमान 5 मई 2016 को जेल गए थे. वहां उन्हें इकरार और अबू ने बताया कि 26 अप्रैल को अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल अधिकारियों की शिकायत करने के बाद उन्हें बहुत मारा पीटा जा रहा है. खाना भी कम कर दिया गया है. पिटाई की वजह से उन्हें चलने और बैठने में भी परेशानी हो रही है. उन्हें 24 घंटे सेल में ही रखा जाता है. इनामुर्रहमान के इस बयान को शपथपत्र के रुप में 6 मई 2017 को सत्र न्यायलय में पेश किया गया.

पिटाई से टूटा कैदी का पैर
इकरार के बयान के बाद उसके साथ जो मारपीट की गई थी, उसमें उसका पैर टूट गया था. इस संबंध में वहां के स्थानीय अखबारों में भी खबरें प्रकाशित हुई थीं. आरोप है कि जेल अधिकारी उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कहते हैं. रात में उन्हें सोने नहीं दिया जाता. नमाज के वक्त उनके साथ मारपीट की जाती है. उन्हें दूसरे बंदियों से बात भी नहीं करने देते हैं. जेल प्रशासन लगातार उन्हें मारने की धमकी देता है या फिर इन कैदियों पर आत्महत्या करने के लिए दबाव बनाया जाता है.

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मांग
15 बिंदुवार तथ्यों के साथ ज्ञापन में इस बात का भी उल्लेख है कि विचाराधीन कैदियों के परिजनों को लगातार उनके एनकाउंटर का डर सताता रहता है. ज्ञापन में आयोग से मांग की गई है कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 (क) के तहत इस मामले की जांच कराई जाए. आयोग अपने समक्ष सभी 21 बंदियों की मेडिकल जांच कराए. धारा 14 के अंतर्गत जेल में इन बंदियों की स्थिति की जांच पड़ताल कराए. धारा 17 के तहत राज्य सरकार से इस संबंध में रिपोर्ट मांगे. धारा 18 के तहत आयोग सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में पहल करे. इन बंदियों के मानवाधिकारों का हनन रोकने के लिए उचित कार्रवाई की जाए.

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