शादी न करने के फैसले पर आखिर क्यों लोग पुचाते हैं इतने सवाल…

मेरे दोस्त ने पूछा, “अभी भी उसी के बारे में सोच रहे हो?” मैंने कोई उत्तर नहीं दिया। उसने फिर जैसे कोई सुई चुभोई, “चुप रहोगे तो इसका मतलब ये नहीं कि तुम अधिक सयाने हो। “वह बोला, “तुम पागल ही हो सकते हो। तुम्हारा अफेयर तो सालों पहले खत्म हो गया लेकिन तुम जिंदगी में आगे बढ़ नहीं पाए… अब छोड़ो, ग्रो-अप। तुम्हें वक्त के साथ समझदार होना चाहिए।”मैंने कहा, “क्या…. तुम्हारी समस्या क्या है? ये मेरी पसंद का मामला है।” मुझे लगा कि मैं उसे एक मुक्का मारूं। लेकिन मैं आखिर कितने लोगों को ऐसे मार सकता हूं? अगर मुझे गुस्सा ही करना है और इस सवाल के लिए किसी को मुक्का मारना है तो मुझे रोजाना यही काम करना होगा। मेरी कहानी क्या है?
मेरी कहानी मेरे गुजरे वक्त और आज से जुड़ी है। प्यार में नाकाम होने के बाद मैंने अकेला यानी सिंगल रहने का फैसला किया। ये उस समाज के लिए एक बड़ा प्रश्न बन गया है जिसके साथ मेरा रोज का नाता है।
मुझे अपने फैसले के लिए क्या सहना पड़ा? फैसले से किसी और को क्या परेशानी है?
मेरे दोस्त, रिश्तेदार और जाननेवाले मुझे अनूठा (अलग कह लें) मानते हैं। मेरे टैलेंट, मेरे काम या फिर मेरे गुणों के कारण नहीं बल्कि मेरे ‘सिंगल’ होने की सामाजिक पहचान के कारण वो मुझे ख़ुद से अलग मानते हैं।
अगर आप इन दोनों सवालों के जवाब में ये कहते हैं कि आप न तो शादीशुदा हैं और न ही कमिटेड तो कई लोगों को आश्चर्य होना स्वाभाविक है। इस बात की अधिक संभावनाएं हैं कि आपको अलग या अजीब प्राणी की तरह देखा जाए और आपकी तरफ लोगों की संवेदना भरी नजरें उठ जाएं। काम के सिलसिले में एक महानगर से दूसरे महानगर आ गया। मैं एक ऐसे माहौल में काम करता हूं जहां अलग-अलग जगहों से आकर लोग काम कर रहे हैं। मैं शहर के एक संभ्रांत इलाके में रहता हूं। यहां रह रहा हर कोई आधुनिक है और अपने काम से काम रखता है।
पड़ोसियों के पास मुझसे बात करने और मुझे जानने का कम ही समय है। जिस जिम में मैं जाता हूं और जिस चाय की दुकान पर मैं रोज चाय पीता हूं, वो सभी अपने काम से काम रखते हैं। उनके साथ औपचारिक बातचीत ही होती है लेकिन जैसी ही उन्हें मेरे सिंगल होने का पता चलता है उनके बीच का “जिज्ञासु व्यक्ति” छटपटाने लगता है।”क्या आप अब भी सिंगल ही हो?” पूछने वाले की आंखें चमक उठती हैं। ऐसा लगता है कि आप अब भी प्लेस्कूल में ही हैं। ऐसे मौकों पर मेरे कुछ दोस्त ही आगे बढ़ मेरे बारे में बताते हैं, “इस साल के आखिर तक ये शादी कर लेगा।” इन दोस्तों को लगता है कि ऐसा बोलकर वो मुझे अपमान से बचा लेंगे। मेरी इच्छा होती है कि मैं कहूं, “अरे सुनो! मुझे अपनी पहचान से कोई शर्म नहीं है और तो और जिस साल का आप जिक्र कर रहे हैं, वो कभी आएगा ही नहीं ” और फिर करीबी लोग ही मेरा नाम लड़कियों के नाम से जोड़ना शुरू कर देते हैं, बिना ये सोचे कि हमारी उम्र में कितना फर्क है, हमारे ओहदे में कितना फर्क है। इस तरह की अफवाहें हर जगह फैलती रहती हैं। लोगों को इस बात का अंदाजा ही नहीं होता कि उनके ऐसे व्यवहार के कारण उनके साथ मेरा संबंध खत्म हो रहा है। सच कहूं तो दुनिया में अच्छे दोस्तों का मिलना वैसे भी बेहद मुश्किल है।
कुछ लोगों को ये जानने में दिलचस्पी है कि मैं वर्जिन हूं या नहीं?
मुझसे अक्सर ये सवाल किया जाता है कि मैं सेक्शुअली एक्टिव हूं या नहीं। कुछ तो मुझसे सीधे यही पूछ लेते हैं कि मेरी ‘हेल्थ’ ठीक भी है या नहीं। एक को तो ये जानने में बहुत दिलचस्पी है कि क्या मेरी दिलचस्पी पुरुषों में है। मैं कहता हूं कि प्रिय दोस्त, अब समझदार हो जाओ, अगर ऐसा होता तो मैं किसी पुरुष के साथ रह रहा होता। अगर मैं ऐसे सवालों का जवाब गुस्से में देता हूं तो तुरंत मुझ पर दोस्ताना न होने का लेबल चस्पा कर दिया जाता है इसलिए मैं खामोश रह जाता हूं। कौन कहता है कि समाज मेरे मामले में जबरदस्ती अपनी नाक घुसा रहा है? वो तो बस मेरे बारे में चिंतित हैं और मुझे उनसे शिकायत नहीं होनी चाहिए। सीधे ये पूछने के बजाए कि मैं कुंवारा हूं या नहीं, कुछ लोग यूं सवाल पूछते हैं, “घर बसा लिया या नहीं “और मैं इस सवाल के जवाब को कुछ मजेदार बनाते हुए कहता हूं, “मैं इस दिशा में काम कर रहा हूं। अच्छा कमा रहा हूं, मेरे ऊपर कोई कर्ज नहीं है और मेरा स्वास्थ्य भी बिलकुल ठीक है”और फिर होता है वही सवाल, “तुमने शादी की या नहीं?”, मुझे लगता है कि मेरा जैसा व्यक्ति जो ‘लाइफ में सेटल’ नहीं हुआ है उसके लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाला सवाल यही है।सिंगल होने के फायदे
सिंगल होने की वजह से मुझे बहुत सी ‘सुविधाओं’ का ‘लाभ’ भी मिला है। ये समाज का एक वर्ग हमें देता है।मेरे एक पूर्व बॉस कहते थे, “तुम सिंगल हो, सप्ताहांत पर दफ्तर आ सकते हो, देर तक काम करना तुम्हारे लिए समस्या नहीं होगी।”मैं उनसे कहना चाहता था कि बॉस, मेरे भी अपने कुछ काम हैं लेकिन मैंने कभी ये कहा नहीं। मेरे घर के मालिक ने एक बार कहा, “तुम अकेले हो, सबसे ऊपर की मंजिल पर रहो, वहां कपड़े सुखाने में भी मदद मिलेगी। बीच वाली मंजिल पर फैमिली रह सकती है।”मैं भी दूसरों की तरह बराबर किराया दे रहा हूं फिर मैं ही सबसे ऊपर क्यों रहूं?
मेरे एक दोस्त ने अपनी गृह प्रवेश पार्टी का न्यौता देते हुए कहा, “तुम सिंगल हो, क्या तुम्हें भी न्यौते की जरूरत है? इस व्हाट्सएप संदेश को ही न्यौता समझो।””तो न्यौते का कार्ड पाने के लिए भी शादीशुदा होना जरूरी है? मेरे लिए तो ये बात खबर जैसी ही है।” जरूरत पड़ने पर मुझे देर तक काम करने में परेशानी नहीं है। घरेलू मामलों में मैं कुछ चीजों को लेकर साथ रहने वालों के लिए समझौता भी कर सकता हूं और हां, मैं पेड़ बचाओ अभियान का समर्थक भी हूं। मैं किसी कार्ड का इंतजार नहीं कर रहा हूं।
तो क्या सिंगल होना अपराध है या अयोग्यता?
शादी कर रहा हूं या नहीं, कर रहा हूं या देर कर रहा हूं, ये मेरी पसंद का मामला हो सकता है। बात जो भी हो, समाज को मेरी बड़ी चिंता है। मुझे भले ही किसी सलाह की जरूरत न हो लेकिन समाज के पास मेरे लिए इसकी भरमार है। मुफ्त नुस्खे, सलाह, अगर मैं अकेला ही रहा तो दस-बीस साल बाद क्या होगी इसकी भविष्यवाणियां और न जाने क्या क्या।
एक साथी ने मुझसे कहा कि मैं ऐसे लोगों से जुड़ूं जो मेरी जैसी ही स्थिति में हैं। मैंने पूछा, “आर्थिक स्थिति में या भौगोलिक स्थिति में?” “नहीं वो लोग जिन्होंने सही समय पर शादी नहीं की। तुम जानते हो, तुम लोग एक दूसरे को समझ सकते हो और बाकी जीवन साथ में अच्छे से बिता सकते हो।”मैंने कभी किसी से ये नहीं कहा कि मैंने शादी करने का सही समय गंवा दिया, ना ही मैंने कभी किसी से ये कहा कि मैं जीवनसाथी तलाश रहा हूं। पहले मैं अपने दोस्तों, रिश्तेदारों की शादियों में और अन्य पारिवारिक समारोहों में जाया करता था। शादी के निमंत्रण कार्ड का सम्मान करना मेरी प्राथमिकता हुआ करता था लेकिन अब मैं अपने आप को बदलने के लिए मजबूर हो गया हूं क्योंकि ऐसे मौकों पर मुझसे कुछ ज्यादा ही सवाल किए जाते हैं। “इतने दिनों बाद आपको देखकर ख़ुशी हुई। पांच साल हो गए, है ना? आपकी बीवी कहां हैं?” और फिर मेरे अगल-बगल देखने और मुझे अकेले पाने के बाद आती हो वही लाइन- “ओह, अभी तक सिंगल ही हो?” मुझे लगता है कि अब मेरे लिए समय आ गया है जब इस पर रोक लगा दूं और बहुत सोच समझकर ही लोगों से बात करूं और समारोहों में जाऊं।
अब जब मैं छुट्टियों के बाद अपने गृहनगर से लौटकर ऑफिस आता हूं तो मैं जानबूझकर खाली हाथ आता हूं। अपने गृहनगर की मशहूर मिठाई नहीं लाता क्योंकि मैं उसी सवाल से बचना चाहता हूं- “कोई खास खबर है क्या?” आमतौर पर इस खास खबर का मतलब होता है- शादी हो जाना या घर में बच्चा होना।
अभी तक शादी क्यों नहीं?
मैं स्कूल के दिनों में क्रिकेट के बजाए हॉकी को पसंद करता था। इस पर कभी सवाल नहीं उठे। जब सब लोग ट्रेंडी नई मोटरसाइकिलें खरीद रहे थे, मैं पुराने दौर की बाइक पसंद कर रहा था। मेरे रंग पर हल्के रंग के कपड़े अच्छे लगते थे लेकिन मुझे गहरे रंग पहनना पसंद था। मैं किसी और क्षेत्र में पढ़ाई की और किसी बिल्कुल अलग क्षेत्र में काम कर रहा हूं। मैं उन सभी लोगों का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मेरी प्राथमिकताओं को समझा और मुझे प्रेरित किया। मेरे दोस्तों और समाज ने मुझे बहुत प्रोत्साहन दिया और मैं जीवन में आगे बढ़ सका। लेकिन जब मेरे सिंगल रहने के सोचे-समझे फैसले की बात आती है तो मुझे वो प्रोत्साहन नहीं मिलता। मैं शादी कर भी सकता हूं और नहीं भी। लेकिन मुझे अभी तक जीवनसाथी नहीं मिला है। मैं इश्क में अपनी नाकामी से आगे बढ़ चुका हूं। लेकिन जिंदगी में आगे बढ़ना एक अलग ही प्रश्न है। मैं अभी वो फैसला लेने की स्थिति में नहीं आ पाया हूं।
फिलहाल तो मैं सिंगल ही हूं। आज का सच यही है, कल की बात कुछ और हो सकती है। क्या मुझे फिर से इश्क होगा? हो सकता है, जब होगा तब वो भी देखा जाएगा।