सिंध के बहाने आड़वाणी का छलकता दर्द

भाजपा को शून्य से सौ फीसद तक सफल करने में अपनी तमाम उम्र लगा देने वाले वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का कहना है कि उन्हें इस बात का दुख है कि उनका जन्मस्थान सिंध, भारत का हिस्सा नहीं है। गौरतलब है कि आजादी के पूर्व अविभाजित भारत का हिस्सा रहे सिंध को बटवारे में पाकिस्तान को दे दिया गया था।
यहां आडवाणी का जन्म हुआ और उसके बाद वो भारत चले आए। ऐसे अनेक लोग हैं जो आजादी के बाद भारत आए उनमें से एक आडवाणी भी हैं, इसलिए रह-रहकर उन्हें यह दु:ख सालता है कि सिंध अब उनका नहीं रहा। यह बात चूंकि आडवाणी ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौजूदगी में कही इसलिए इसके विशेष मायने भी निकाले जा रहे हैं। अनेक जगह तो यह तक पूछा जाने लगा है कि क्या सिंध वापस भारत का हिस्सा नहीं हो सकता? वैसे आडवाणी के दर्द का कारण दूसरा ही है, लेकिन उसे जुबांन पर लाना नामुमकिन जैसा हो गया है।