अन्तर्राष्ट्रीयटॉप न्यूज़
हिलेरी भारत के लिए फायदेमंद, डोनाल्ड ट्रंप भरोसे लायक नहीं


अंतरराष्ट्रीय मामले में उनका न तो कोई तजुर्बा है और न ही उन्होंने सरकारी पद पर कोई काम किया है। दूसरी तरफ हिलेरी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति बराक ओबामा से इतर भारत केसाथ खासा समीकरण है। हालांकि ट्रंप ने भारतीय वोटरों को रिझाने केलिए भारत और हिंदू धर्म की तारीफ जरूर की है लेकिन उनका कोई भरोसा नहीं। ट्रंप भारतीय-अमेरिकियों का बीच अपनी जगह भी नहीं बना पाए हैं।
इतनी बहकी बातें करने के बावजूद ट्रंप को अमेरिका की तीन बड़ी लॉबी मदद कर रही है। वह है गन, चर्च से जुड़ा अमेरिका का कट्टर एलीट वर्ग और दवा और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी फार्मा लॉबी। यह लॉबी डेमोक्रेट की सरकार नहीं चाह रही। अमेरिकी नागरिकों के बंदूक रखने के अधिकार की वकालत करने वाली अति प्रभावी संस्था नेशनल रायफल एसोसिएशन के खिलाफ जाकर हिलेरी ने हथियारों की खुलेआम बिक्री पर अंकुश लगाने की वकालत की है। इससे गन लॉबी परेशान है। ओबामा के नए स्वास्थ्य बीमा की वजह से फार्मा लॉबी की मनमानी पर अंकुश लगा है। अमेरिकी एलीट वर्ग का बड़ा हिस्सा इन लॉबियों के कर्ताधर्ता हैं। संकेत इस बात के भीमिल रहे हैं कि एफबीआई की ई-मेल के हथकंडे के पीछे कहीं न कहीं यही लॉबी काम कर रही है। लेकिन इस सबके बावजूद मेरा मानना है कि हिलेरी क्लिंटन का पलड़ा भारी है।