15 मिनट में 1500km, जिसे रडार भी नहीं पकड़ पाएंगे, कर्तव्य पथ पर गूंजेगी ‘हाइपरसोनिक’ दहाड़

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुदर्शन चक्र के लिए देश को तैयारी करने की बात कही है और इसीलिए अब आत्मनिर्भरता के साथ DRDO पूरी मुस्तैदी के साथ अलग-अलग बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। मिसाइल फ़ोर्स रॉकेट फोर्स में शामिल होने वाली मिसाइल चौकी सुदर्शन चक्र का एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
तूफानी रफ्तार वाली भारत की एंटी शिप मिसाइल
DRDO की तरफ से बनाई गई लॉन्ग एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल को गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। एलआर-एएसएचएम एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जो स्थिर और गतिमान दोनों प्रकार के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है तथा विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन की गई है।
ये 1500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली मिसाइल है और दुश्मन के जहाजों को पूरी तरह से खत्म कर सकता है।
यह मिसाइल हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरती है, यानी इसकी रफ्तार ध्वनि की गति से कई गुना अधिक होती है।
इसको इस समय हैदराबाद की DRDO की आर सी आई लैब में तैयार किया जा रहा है।
ये आसानी से दुश्मन के रडार को धोखा दे सकता है और दुश्मन के युद्धपोत को तबाह कर सकता है अभी इसका नेवल वर्जन है लेकिन आने वाले टाइम पर और इसे तैयार किया जाएगा।
बता दें कि पहली बार कर्तव्य पथ पर देश के सामने इसकी पहली झलक दिखाई देगी। इसका मकसद बिलकुल साफ है देश को मजबूत और सशक्त बनाना।
प्रलय मिसाइल
दूसरी मिसाइल प्रलय हैं जिसकी मारक क्षमता 150 किलोमीटर से लेकर 500 किलोमीटर तक है।
प्रलय को DRDO के अंदर ही तैयार किया गया है। ये इस समय पूरी तरह से तैयार है। इसकी रेंज को और बढ़ाया जा सकता है।
यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है, जिससे यह इंटरसेप्टर मिसाइलों को चकमा देने में पूरी तरह सक्षम है।
इसका मकसद है दुश्मन के रडार से लेकर एयर स्ट्रिप तक सबको तबाह कर देना, वो भी पलक झपकते ही।
इसे लॉन्चर की मदद 1 जगह से फायर करके दूसरी जगह ले जाया जा सकता है।
ये दुश्मन की आंखों के सामने बिना अपना काम कर देगी।



