20 में से 8 सरकारी बैंक दिवालिएपन की कगार पर

नई दिल्ली(एजेंसी)। एनपीए की मार से ठीक तरह से उबर नहीं पाने की वजह से 20 में से 8 सरकारी बैंक दिवालिएपन की कगार पर आ गए हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने बीते एक वर्ष के दौरान इन बैंकों की स्थिति सुधारने के लिए कई प्रयास किए जिनमें बैंकों का विलय, रीकैपिटेलाइजेशन प्लान सहित कई योजनाएं शामिल थ्री, लेकिन इस सब के बावजूद भी इनमें कोई सुधार नहीं देखा गया।
बीते एक साल में इन सरकारी बैंकों का प्रदर्शन निराशाजनक ही रहा है। अब इसी के तहत वित्त मंत्रालय घाटे वाले बैंकों की ब्रांच को बंद करने की तैयारी कर रहा है। जिनमें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की 20 हजार ब्रांचेस शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक 8 बड़े़ पीएसयू बैंकों ने एक साल के दौरान निवेशकों को नकारात्मक रिटर्न दिया है।
नकारात्मक रिटर्न देने वाले बैंक हैं- सेंट्रल बैंक -8.37 प्रतिशत, बैंक ऑफ महाराष्ट -22.67 प्रतिशत, देना बैंक -22.34 प्रतिशत, युनाइटेड बैंक -9.74 प्रतिशत, आईडीबीआई -9.24 प्रतिशत, यूको बैंक -7.61 प्रतिशत, आईओबी -7.44 प्रतिशत और कॉरपोरेशन बैंक -0.74 प्रतिशत। इसके अलाबा कुछ बड़े सरकारी बैंकों जिनमें एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक और ओरिएंटल बैंक ने भी निराश किया है, जिनका बीते एक माह का प्रदर्शन लगभग 6 और 7 प्रतिशत के बीच रहा है।