78 आत्मसमर्पित माओवादियों ने देखी छत्तीसगढ़ विधानसभा, कहा- आंखें खोलने वाला अनुभव

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के 78 आत्मसमर्पित माओवादियों ने शुक्रवार को रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ विधानसभा का भ्रमण किया। बस्तर के घने जंगलों में लंबे समय तक सक्रिय रहे ये पूर्व माओवादी सदन की जीवंत कार्यवाही देखकर हैरान रह गए और इसे “आंखें खोलने वाला अनुभव” बताया।
लोकतंत्र का प्रत्यक्ष अनुभव
आत्मसमर्पित व्यक्तियों ने कहा कि विधानसभा में जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया उन्होंने देखी, वह जंगलों में उन्हें सुनाई गई कथाओं से पूरी तरह अलग थी। अब ये नागरिक सामान्य जीवन जीने और सरकारी योजनाओं—भोजन, आवास, कौशल प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता—का लाभ उठाने के इच्छुक हैं।
शैक्षणिक दौरे का उद्देश्य
यह दौरा राज्य की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत आयोजित किया गया था, ताकि इन व्यक्तियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से परिचित कराया जा सके। इसका मकसद यह दिखाना था कि जनप्रतिनिधि किस प्रकार चर्चा और बहस के माध्यम से जन कल्याण के लिए कानून बनाते हैं। जो कभी हथियार लेकर गोरिल्ला रास्तों पर चले थे, वे अब पुनर्वास की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ रहे थे।
सदन और विधायी प्रक्रिया का अवलोकन
आत्मसमर्पित माओवादी सदन की कार्यवाही दर्शक दीर्घा से देखे और विधायी प्रक्रिया, निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधित्व और शासन व्यवस्था की बारीकियों को समझा। इस दौरान उन्होंने मंत्री केदार कश्यप से मुलाकात की। सुकमा विधायक और पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने उनका व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया और हिंसा त्यागने के उनके साहस की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।



