राष्ट्रीय

ओडिशा में भाजपा ने दी कांग्रेस का पटखनी,दूसरे नंबर पर पहुंची

36 सीटों से 71 सीटों पर पहुंची

नई दिल्ली (ईएमएस)। ओडिशा में स्थानीय निकायों के चुनाव में बीजेपी ने शानदान प्रदर्शन कर चौंका दिया है, पहले चरण के चुनाव में बीजेपी सत्तारूढ़ बीजू जनता दल के बाद दूसरे नंबर पर आई है और उसने कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेल कर प्रमुख विपक्षी दल का स्थान ले लिया है। बीजेपी के इस प्रदर्शन के बाद 2019 में होने वाले अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी के नेता दावा करने लगे हैं, जिला परिषद की 188 सीटों के लिए हुए पहले चरण के चुनाव में बीजेडी ने 96 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी को 71 सीटों पर कामयाबी मिलीं। कांग्रेस को सिर्फ 11 सीटें ही मिल पाईं, पांच साल पहले हुए चुनाव में जिला परिषद की 851 सीटों में से बीजेडी को 651 सीटें मिली थीं और कांग्रेस को 126, तब बीजेपी सिर्फ 36 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी थी, बीजेपी ने कालाहांडी में सभी 9 जिला परिषद सीटें जीतीं थी।
बीजेपी का आरोप है कि राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर धांधली की है, राज्य के लिए बीजेपी का चेहरा और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में गड़बड़ियां की गईं, वहीं राज्य के लिए बीजेपी के प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह का कहना है कि पहले चरण के मतदान के बाद ही वोटों की गिनती कराके सत्तारूढ़ बीजेडी बाकी चरणों में बढ़त बनाना चाहती है लेकिन ऐसा नहीं होगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों को बीजेपी के प्रदर्शन पर हैरानी है, क्योंकि अमूमन इस राज्य में बीजेडी और कांग्रेस के बीच मुकाबला माना जाता है,बीजेपी लंबे समय तक बीजेडी की सहयोगी रही और उसकी छत्रछाया से मुक्त होने की कोशिश करती रही, सीटों के बंटवारे को लेकर जब दोनों पार्टियों का गठबंधन टूटा तब अकेले लड़ी बीजेपी का बेहद खराब प्रदर्शन रहा था।

पार्टी महासचिव अरुण सिंह का कहना है कि बीजेपी ने हार से सबक लेते हुए संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया है, पार्टी ने मंडल स्तर पर संगठन गढ़ने की शुरुआत की, सभी मंडल कार्यकर्ताओं को बुला कर आम राय से मंडल अध्यक्ष चुने गए, इसी तरह जिला अध्यक्षों का चुनाव हुआ। पार्टी ने राज्य में नवीन पटनायक सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम किया, पार्टी ने हर महीने मंडल स्तर पर पटनायक सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किए और हर तीन महीने में जिला स्तर पर, इसके बाद हर छह महीने में राज्य स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई गई।

10 विधायकों के साथ बीजेपी फिलहाल राज्य में तीसरे नंबर पर है,पिछले विधानसभा चुनाव में उसे 18 फीसदी वोट मिले थे,जबकि करीब 26 फीसदी वोट लेकर कांग्रेस ने 16 विधायक जीते थे, बीजेपी में दूसरी पार्टियों से कई बड़े नेता शामिल हुए हैं,साथ ही, पार्टी खुद को बीजेडी के विकल्प के रूप में स्थापित करने में जुटी हुई है।

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