
नई दिल्ली. 26 जनवरी के आसपास दिल्ली में बड़े धमाके की साजिश रची गई थी. रविवार रात मथुरा के पास भोपाल शताब्दी से एक संदिग्ध को अरेस्ट किया गया. इसी संदिग्ध की निशानदेही पर 2 लोगों की तलाश में दिल्ली के कई होटलों पर सर्च ऑपरेशन किया गया. जांच में सामने आया है कि दोनों संदिग्ध एक दिन पहले ही होटल छोड़ चुके हैं. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, यूपी ATS और IB की टीमों के साथ दोनों संदिग्धों की तलाश कर रही है.
दो संदिग्धों की दिल्ली में मौजूदगी से सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं. पुरानी दिल्ली के इलाके में हर रविवार लगने वाला संडे मार्केट संभवतः इसी अंदेशे से रविवार को बंद रखा गया. अमूमन ये मार्केट गणतंत्र दिवस से एक हफ्ते पहले बंद रहता है. सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मिला है कि गणतंत्र दिवस कार्यक्रम और दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर पर आतंकी हमला हो सकता है.
बता दें कि रविवार रात भोपाल शताब्दी से गिरफ्तार हुए संदिग्ध मामले में जानकारी मिली है कि इस शख्स की हरकतें टीटीई को संदिग्ध लगीं थी. टीटीई ने फौरन इसकी सूचना जीआरपी को दी. मथुरा के पास जीआरपी ने इस शख्स से पूछताछ की जिसमें उसने अपना नाम बिलाल अहमद वानी बताया. मीडिया रिपोर्ट्स में जानकारी मिली है कि बिलाल अनंतनाग का रहने वाला है.
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि वो और उसके दोस्त दिल्ली में गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम और अक्षरधाम मंदिर पर हमला करने की तैयारी कर रहे हैं. ये जानकारी मिलते ही जीआरपी अधिकारियों के कान खड़े हो गए. इसकी जानकारी तुरंत यूपी ATS को दी गई. यूपी ATS ने जब बिलाल से सख्ती से पूछताछ की तो वह पागलों जैसी हरकत करने लगा.
जामा मस्जिद के पास लिया था कमरा
बिलाल अहमद वानी ने पुलिस को जानकारी दी कि वह और उसके दो साथी दिल्ली में स्थित जामा मस्जिद के पास होटल अल राशिद में रुके थे. वह होटल से निकल आया लेकिन उसके दो दोस्त वहीं हैं. यूपी पुलिस ने इस इनपुट को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और आईबी से शेयर किया. इसी जानकारी के तुरंत बाद स्पेशल सेल और आईबी की टीमें जम जम गेस्ट हाउस और होटल अल राशिद पर रेड करने पहुंची थीं.
फरार होने में कामयाब रहे आतंकी
होटल अल रशीद में पुलिस को जानकारी मिली की 2 जनवरी को वे लोग यहां आए थे और 6 जनवरी की रात साढ़े 8 बजे यहां से निकल गए. होटल अल रशीद के मैनेजर ने एक हिंदी टीवी चैनल को बताया कि 3 लोग 2 जनवरी को यहां आए थे. यह लोग दिन में बाहर ही रहते थे और रात को सोने के लिए आते थे. कई बार जब यहां दिन में भी रुके रहते थे तो खाना खाने जाते थे. हालांकि होटल में इनसे मिलने के लिए कोई नहीं आया और इनकी गतिविधियां भी असामान्य नहीं थीं.