अजब-गजब
यहां भैंस चराने वालों की हो रही अच्छी कमाई, वेतन जानकर हैरान रह जायेगे आप…

ज्यादा पैसा कमाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है लेकिन यहां तो सिर्फ भैैंस चराने के बदले मस्त कमाई हो रही है। अगर आप इस बारे में जान लेंगे तो आपको भी हैरानी होगी। एक रिपोर्ट की मानें तो इस काम के लिए यहां स्पेशल मजदूर हायर किए जाते हैं और मजदूर भी खुशी-खुशी यह काम करते हैं। ऐसा शायद ही आपने पहले कभी सुना होगा कि भैंसों को चराने के लिए भी अच्छी सैलरी मिलती है। 

एक रिपोर्ट की मानें तो नोएडा और ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे के पास एक गांव है जिसका नाम है ‘झट्टा’… यहां भैंस चराने के लिए लोग अपने मजदूरों को अच्छे पैसे देते हैं। गांव के किसानों ने अपनी भैंसों को चराने के लिए बिहार और पूर्वी यूपी के बेरोजगार युवकों को नौकरी पर रखा है। यह सुबह जल्दी उठकर किसानों के घर जाकर भैंसों को खोल लेते हैं और उन्हें गांव के बाहर खेतों में चराने ले जाते हैं।
रिपोर्ट की मानें तो 50 भैंसे चराने के एवज में यहां एक मजदूर कम से कम 25 हजार रुपए महीना कमा लेता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें बिहार और यूपी के कई लोग इसी काम में लगे हुए हैं। दरअसल, जो लोग चरवाहों का काम कर रहे हैं, वे मुख्य रूप से एनसीआर में फसल की बुआई और कटाई के लिए आते थे।
इधर किसानों के पास इतना समय ही नहीं रहता कि वे दिनभर भैंसों को चराने में लगे रहें। किसानों ने ही इन मजदूरों को कहा कि वे उनकी भैंसों को चरा दिया करें और बदले में प्रति भैंस 500 से 700 रुपये महीना ले लें। मजदूरों को यह बात जच गई। बस फिर क्या था फॉर्मुला हिट हो गया और अब आसापस के इलाके के गांवों में भी इसी तर्ज पर भैंसों के लिए चरवाहे काम पर लग गए हैं।
किसानों ने बड़ा सोच समझ कर हिसाब लगाने के बाद अपने मजदूरों को यह काम सुझाया। हिसाब ये लगाया कि एक भैंस औसतन 8 से 10 किलो दूध रोजाना देती है। इस तरह महीने में 15 हजार रुपये की कमाई हो जाती है। ऐसे में 500 रुपये लेकर कोई अगर भैंसों को चरा देता है तो इससे फायदा तो है ही, साथ ही वक्त की भी बचत होती है।ये चरवाहे गांव में ही किसी के मकान में किराए पर परिवार के साथ रहते हैं। भैंसों को चराने के बाद हिंडन या यमुना नदी में नहला देते हैं। उसके बाद शाम पांच बजे भैंसों को वापस गांव ले आते हैं।