अजब-गजब
डॉक्टर बेटी को आना था मायके पर ससुराल से निकली अर्थी, ये था आखिरी मैसेज…

पापा कल रात मैं और उदित डिनर आपके साथ करेंगे…। आस्था के परिजन यह कहते हुए फफक पड़े। उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि जिस बेटी के घर आने का इंतजार कर रहे थे, वह दुनिया ही छोड़ गई। आस्था ने शनिवार दिन में अपने पिता से मोबाइल फोन पर चैट कर रविवार शाम अपने मायके आकर डिनर करने का वादा किया था।

हमेशा से पढ़ाई में टॉपर रही आस्था का चयन आईआईटी और एमबीबीएस में हो गया था, लेकिन उसने इंजीनियरिंग करने से डॉक्टर बनना बेहतर समझा और वहां भी टॉप करती रही। वह एमडी करने के बाद भी सुपर स्पेशलिटी क्रिटीकल केयर की पढ़ाई व नौकरी एक साथ कर रही थी।
आस्था के माता-पिता एस-1/96, तीसरी मंजिल पंचशील पार्क, दक्षिण दिल्ली में रहते हैं। परिवार में पिता रमेश मुंजाल, मां श्वेता व भाई आनंद है। परिवार का अपना कारोबार है। एक रिश्तेदार ने बताया कि शादी के बाद आस्था पूसा रोड स्थित ससुराल में रह रही थी। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। शनिवार को आस्था ने नया मोबाइल खरीदा था। दोपहर में खाना खाने के बाद वह पति के साथ मोबाइल का नया कवर भी खरीदने गई थी।
इसके बाद शाम करीब 4.15 बजे वह घर से अस्पताल के लिए निकल गई। रात 10.45 बजे आस्था ने उदित से बिल्कुल सामान्य हालत में बातचीत की। उसने किसी तरह की परेशानी या अन्य किसी बात का जिक्र पति से नही किया था। उदित से उसने रविवार को अपने घर जाने के बारे में बताया था। ऐसे में उसके परिजन कतई मानने को तैयार नहीं है कि उसने आत्महत्या की है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट खोलेगी मौत का राज
डॉक्टर आस्था की मौत के बाद उसके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मौत के पीछे कोई न कोई बड़ी साजिश है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद मौत के वास्तविक कारणों से पर्दा उठ पाएगा। परिजनों का कहना है कि रात 12.15 बजे की अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज देखी है, जिसमें आस्था सहज दिख रही है।
डॉक्टर आस्था की मौत के बाद उसके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मौत के पीछे कोई न कोई बड़ी साजिश है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद मौत के वास्तविक कारणों से पर्दा उठ पाएगा। परिजनों का कहना है कि रात 12.15 बजे की अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज देखी है, जिसमें आस्था सहज दिख रही है।
परिजन जितेंद्र हरदोई ने बताया कि जिस दवा से आस्था की मौत की बात की जा रही है उसकी पूरी शीशी कोई अपने आप नही ले सकता है। इंजेक्शन लेने के 15 से 20 सैकंड में दवा का असर हो जाता है और दवा लेने वाला बेहोश हो जाता है। शव की जांच की गई तो उसके बाएं हाथ पर जबरदस्ती के निशान हैं।
जितेंद्र का आरोप है कि कुछ मरीजों का कहना है कि रात करीब 12.30 बजे अस्पताल में अचानक डॉक्टरों की मूवमेंट देखी गई थी। इसके अलावा परिजनों ने जब अस्पताल के इंचार्ज से बातचीत करने का प्रयास किया तो वह गोलमोल बात कर खिसक गया। ऐसे में उन्हें शक है कि अस्पताल प्रशासन उनसे कुछ छुपाने का प्रयास कर रहा है। डॉक्टर की मौत कैसे हुई, फिलहाल यह जांच का विषय है। क्राइम टीम व अन्य विशेषज्ञों ने साक्ष्य जुटाए हैं। सीरिंज व इंजेक्शन की बोतल को कब्जे में ले लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा।