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अभी-अभी: लोकसभा चुनाव 2019 लड़ने को लेकर अक्षय कुमार ने लिया बड़ा फैसला

लोकसभा चुनाव 2019 लड़ने को लेकर एक्टर अक्षय कुमार ने बड़ा फैसला लिया है। इसके बारे में बताते हुए अभिनेता ने कहा कि जिंदगी मजे में चल रही है और वे सुखी रहना चाहते हैं।

अक्षय कुमार ने पंजाब से चुनाव मैदान में उतरने के तमाम कयासों पर विराम लगा दिया है। चंडीगढ़ में सोमवार को फिल्म केसरी के प्रमोशन के लिए पहुंचे अक्षय कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में यह बात साफ कर दी कि वह कहीं से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। अक्षय से जब यह पूछा गया कि क्या आप राजनीति में आएंगे तो उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि वह सुखी रहना चाहते हैं। राजनीति में आने का उनका कोई इरादा नहीं है। इस दौरान उनके साथ अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा और फिल्म के निर्देशक अनुराग सिंह भी मौजूद थे।
फिल्म केसरी के बारे में अक्षय ने कहा कि पगड़ी सिखों की शान है। मैंने जैसे ही पगड़ी बांधी तो मेरी रीढ़ की हड्डी एकदम सीधी हो गई और ऐसा लगा जैसे मेरे भीतर असीम ताकत आ गई। पगड़ी की बात ही निराली है। केसरी की तैयारी काफी समय से चल रही थी। यह उनकी जिंदगी का अब तक का सबसे अहम किरदार है, जिसके लिए उन्होंने काफी मेहनत की है। चाहे बैटल ऑफ सारागढ़ी के समय के एक्शन हों या तलवारबाजी हो या हथियार चलाना। सभी करने में उन्होंने काफी मेहनत की।
अक्षय कुमार ने कहा कि केसरी एतिहासिक फिल्म है और सारागढ़ी की लड़ाई सबसे बड़ी जंग है। इस जंग के बारे में किताबों में चैप्टर होना चाहिए। इस फिल्म में कई खूबियां हैं। मसलन, जब एक फौजी को गोली लगती है तो तीस से चालीस सेकेंड में उसकी आंखों के सामने जिंदगी का सारा निचोड़ आ जाता है। किसी भी फिल्म की कहानी को ड्रामेटाइज करना काफी महत्वपूर्ण होता है। ऐसा ही केसरी में किया गया। इसमें बैटल ऑफ सारागढ़ी दिखाई गई है, जिसके लिए सारे तथ्य जुटाए गए और उसके बाद फिल्मांकन किया गया।
अक्षय कुमार ने बताया कि जब फिल्मांकन किया जाता है तो उसको वास्तविकता के एकदम करीब रखते हुए दर्शकों के देखने लायक तैयार किया जाता है। कोई डाक्यूमेंट्री तो बनानी नहीं थी। केसरी काफी रिसर्च के बाद तैयार हुई है। उन्होंने खुद इस फिल्म को सेलेक्ट किया था। उसके बाद अनुराग सिंह से बातचीत की। अनुराग सिंह ने एक संस्था से संपर्क किया। उसके बाद सारी कहानी तैयार हुई। बैटल ऑफ सारागढ़ी दुनिया की पांच बड़ी जंगों में दूसरे नंबर पर है। इसमें 21 फौजियों की जंग दस हजार घुसपैठियों से थी।