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दिल्ली की सीटों पर हार के बाद राहुल गांधी के सख्त हुए तेवर, उठाया ये बड़ा कदम

इस्तीफे की राजनीति के बीच कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी ने दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर हार को लेकर सख्त तेवर अख्तियार कर लिए हैं। उन्होंने सभी प्रत्याशियों से हार की रिपोर्ट देने को कहा है। इस रिपोर्ट में उन्होंने बूथ स्तर तक जानकारी मांगी है कि कहां क्या स्थिति रही और कहां पर कितना काम हुआ, कितना नहीं। दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित ने भी पांच सदस्यीय समीक्षा कमेटी से हार पर अपनी रिपोर्ट जल्द देने को कहा है। माना जा रहा है कि यह दोनों रिपोर्ट ही प्रदेश संगठन में बदलाव और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति का आधार बनेंगी।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष हार की वजह जानने के लिए हर बूथ तक जाना चाहते हैं और यही वजह है कि उन्होंने बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से बातचीत कर हार के कारणों का पता लगाने का निर्देश दिया है। प्रत्याशी अपनी अपनी रिपोर्ट तैयार करके प्रदेश प्रभारी पीसी चाको को देंगे और चाको के माध्यम से यह रिपोर्ट आलाकमान को भेज दी जाएगी। संभावना है कि इस रिपोर्ट के आने के बाद पार्टी की कार्यशैली और संगठन स्तर पर व्यापक स्तर पर आवश्यक बदलाव भी किए जाएंगे।

दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित ने हार की समीक्षा के लिए गठित पांच सदस्यीय कमेटी से अपनी रिपोर्ट जल्द देने को कहा है ताकि उस पर कार्रवाई कर आगे बढ़ाया जा सके। बताया जाता है कि कमेटी की रिपोर्ट में देर इसलिए हो रही है क्योंकि सात में से चार प्रत्याशी और 14 से तीन जिलाध्यक्ष अभी तक कमेटी के समक्ष प्रस्तुत ही नहीं हुए हैं। ऐसे में कमेटी ने बचे हुए जिलाध्यक्षों को जहां शुक्रवार को प्रदेश कार्यालय बुलाया है वहीं एक दो दिन में सभी ब्लॉक अध्यक्षों से भी हार पर उनकी राय लेने का निर्णय किया है। बताया जाता है कि बचे हुए प्रत्याशी भी अपनी राय कमेटी के बजाए बंद लिफाफे में शीला को सौंप सकते हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले सप्ताह के पूर्वार्ध तक कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर देगी।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट के आधार पर संगठन में तो फेरबदल होगा ही, प्रदेश कार्यकारिणी को भी जल्द ही गठित किया जाएगा। पार्टी इस पर भी गंभीरता से विचार कर रही है कि विधानसभा चुनाव के लिए समय से पूर्व प्रत्याशियों को क्षेत्र में उतार दिया जाए ताकि उन्हें काम और प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिल सके। कांग्रेस संभावित प्रत्याशियों को विधानसभा प्रभारी के रूप में भी नियुक्त कर सकती है। जिन प्रभारियों का काम बेहतर होगा, उन्हें ही बाद में टिकट दे दिया जाएगा। इसके अलावा कांग्रेस इस बार सख्ती के साथ टिकट वितरण में यह नियम भी लागू करने पर विचार कर रही है कि जो प्रत्याशी लगातार दो बार चुनाव हार चुके हैं, उन्हें कहीं से प्रत्याशी नहीं बनाया जाए।

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