
मायावती ने खेला आरक्षण कार्ड , सवर्णों के लिए मांगा रिजर्वेशन
बसपा सुप्रीमो मायावती ने संसद में आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को आरक्षण देने की बात कर राजनीति दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। मायावती के इस बयान को मिशन 2017 की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।अगर मायावती इस मुद्दे को सवर्णों के बीच भुनाने में कामयाब हुई तो आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्ण बसपा के साथ खड़े हो सकते हैं और अन्य दलों के सभी समीकरण धराशायी हो सकते हैं।
यह मुद्दा बसपा के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। कई सियासी दल इस मुद्दे को काफी संवेदनशील मानते हैं और बड़े ही सधे अंदाज में इसका जवाब भी दे रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर मायावती के सवर्णों को आरक्षण की मांग पर भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि मायावती का यह बयान तब क्यों नहीं आया, जब वह 10 वर्षों तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार का समर्थन कर रही थीं।
यह एक संवेदनशील मुद्दा है, इस पर इससे ज्यादा कुछ भी बोलना जल्दबाजी होगी। राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. मसूद अहमद ने भी मायावती के इस बयान को काफी संवेदनशील करार दिया। उन्होंने कहा कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है।
आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को अगर आरक्षण मिलता है तो यह अच्छी बात होगी। वहीं समाजवादी पार्टी ने मायावती पर उनकी ही बात को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है। समाजवादी पार्टी के नेता डॉ. सीपी राय ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान ही सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अपने घोषणा-पत्र में अगड़ी जाति आयोग गठित करने की बात कही थी।
पार्टी हमेशा इसकी पक्षधर रही है कि समाज में बड़ी जातियों के गरीब लोगों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।



