उत्तराखंड

‘मूल निवास’ व ‘भू-कानून’ की मांग को लेकर निकाली ‘स्वाभिमान महारैली’

देहरादून (गौरव ममगाईं)। आज रविवार को देहरादून में मूल निवास कानून व सख्त भू-कानून की मांग को लेकर मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति की ओर से विशाल मूल निवास स्वाभिमान महारैली का आयोजन किया गया। रैली में सामाजिक, लोक संस्कृति व राजनीति समेत अनेक क्षेत्रों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

 यह महारैली परेड ग्राउंड से बुध्दा चौक, तहसील चौक होते हुए कचहरी परिसर स्थित शहीद स्मारक में पहुंची। इसके बाद यहां जनसभा हुई, जिसमें अनेक वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया। संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि मूल निवास व सख्त भू-कानून राज्य गठन के समय से ही मुख्य मुदद् रहे हैं। उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड के अलग होने का मुख्य कारण ही यहां के लोगों की उपेक्षा होना था, लेकिन अलग राज्य मिलने के बाद भी उत्तराखंड के लोगों का हक बाहरी लोगों को दिया जा रहा है। इसे कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है।

कहा कि उत्तराखंडवासियों की मांग है कि प्रदेश में मूल निवास कानून लागू किया जाये, जिसकी कट ऑफ डेट 26 जनवरी 1950 घोषित की जाये। दूसरा यह कि सख्त भू-कानून लागू हो, ताकि अन्य राज्यों से आने वाले भू-माफियाओं से प्रदेश की जमीन को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि सीएम धामी ने पिछले दिनों इस मसले पर थोड़ा सकारात्मक रूख जरूर दिखाया है, लेकिन उनका आंदोलन चलता रहेगा। जब तक ये कानून नहीं बन जाते उत्तराखंडवासी चुप बैठने वाले नहीं हैं। बता दें कि इस आंदोलन का उत्तराखंड के प्रसिध्द लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी व उप्रेती बहनें ज्योति व निरजा उप्रेती ने भी समर्थन किया है। उन्होंने आंदोलन के समर्थन में लोकगीत भी प्रस्तुत किया है।

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