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बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में बड़ी सफलता: पालघर में 1.5 KM लंबी सुरंग का काम पूरा, जानें अगले स्टेप

Bullet Train Tunnel In Palghar News: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। पालघर जिले में विरार और बोइसर के बीच 1.5 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई का काम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली से ऑनलाइन इस ऐतिहासिक क्षण का अवलोकन किया और इसे परियोजना की एक बड़ी उपलब्धि बताया।

रेल मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, विरार और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच निर्मित यह 1.5 किलोमीटर लंबी सुरंग पालघर जिले की सबसे लंबी सुरंगों में शुमार है। इसे परियोजना में ‘माउंटेन टनल-5’ के नाम से जाना जाता है। महाराष्ट्र में यह दूसरी ऐसी सुरंग है जिसकी खुदाई का कार्य पूरी तरह पूर्ण हो चुका है। इससे पहले, सितंबर 2025 में ठाणे और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) के बीच 5 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का निर्माण कार्य पूरा किया गया था, जो राज्य में इस प्रोजेक्ट की पहली बड़ी उपलब्धि थी।

क्या बोले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव?
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर पर कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना में इंजीनियरिंग की कई बड़ी चुनौतियां हैं, जिनमें कुल सात पहाड़ी सुरंगें और एक समुद्र के नीचे की सुरंग शामिल है।

कहां-कहां बनेंगे स्टेशन?
इस पूरी परियोजना में कुल 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जो दो राज्यों को आपस में जोड़ेंगे। महाराष्ट्र में मुंबई (BKC), ठाणे, विरार और बोईसर स्टेशन होंगे, जबकि गुजरात में वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती स्टेशन कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे। साबरमती और मुंबई (BKC) इस मार्ग के प्रमुख टर्मिनल स्टेशन होंगे, और पूरे रूट के लिए तीन आधुनिक डिपो भी तैयार किए जा रहे हैं।

रफ्तार और जापान का तकनीकी सहयोग
मुंबई से अहमदाबाद के बीच यह 508 किलोमीटर लंबी रेल लाइन गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली के क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। यह भारत की एकमात्र रेल परियोजना है जहां ट्रेनें 320 किलोमीटर प्रति घंटे की अविश्वसनीय रफ्तार से दौड़ेंगी। इसके शुरू होने के बाद यात्री पूरी दूरी को केवल 2 घंटे 17 मिनट में तय कर सकेंगे, जिससे यात्रा के समय में भारी बचत होगी। यह महत्वाकांक्षी परियोजना पूरी तरह से जापान सरकार की तकनीकी और वित्तीय सहायता से संचालित की जा रही है, जो भारत के परिवहन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।

यह परियोजना उस तेज रफ्तार तीर की तरह है जो आधुनिक इंजीनियरिंग की मदद से भौगोलिक बाधाओं (पहाड़ों) को चीरते हुए दो बड़े आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए तैयार है।

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