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SIR: एक पिता पर कितने बच्चों के दावे, पहली बार किसी को इस वजह से नोटिस

नई दिल्ली : देश के 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया चल रही है. इसमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है. चुनाव आयोग ने यहां पर कुछ लोगों को अजीबो-गरीब वजह से नोटिस भेजा है. आयोग ने उन्हें अपनी योग्यता साबित करने के लिए बुलाया भी है. ये वे लोग हैं जिन्होंने SIR के दौरान इलेक्टोरल रोल में अपने एन्यूमरेशन फॉर्म में एक ही व्यक्ति को माता-पिता के तौर पर नाम दिया है और ऐसे 6 लोग हैं.

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार ये नोटिस ECI ने बनाए हैं और ECI के सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर स्थानीय अधिकारियों के लॉग-इन पर भेजे गए हैं और फिर इन्हें जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं, बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए भेजा गया है.

पश्चिम बंगाल में जारी किए गए नोटिस की कॉपी दिखाती है कि उनमें वोटर का नाम और दूसरी डिटेल्स पहले से भरी हुई हैं, साथ ही नोटिस जारी करने का कारण भी लिखा है. नोटिस पर असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) की मुहर और साइन हैं. कानून के मुताबिक, किसी वोटर की एलिजिबिलिटी के बारे में कोई शक होने पर असेंबली कॉन्स्टिट्यूएंसी का ERO या AERO ही नोटिस जारी कर सकता है और सुनवाई के लिए बुला सकता है.

नोटिस बांग्ला में जारी हुआ है, जिसमें वोटर्स को बताया गया है कि निर्वाचन क्षेत्र में SIR चल रहा है और उनके एन्यूमरेशन फॉर्म मिल गए हैं. नोटिस में कहा गया है, आपको किसी ऐसे व्यक्ति का बेटा/बेटी बताया गया है जिसे छह अन्य लोगों ने अपना पिता बताया है, जिससे गलत कनेक्शन होने का शक पैदा होता है. इसके बाद वोटरों से कहा गया है कि वह तय जगह और समय पर सुनवाई के लिए आएं और ECI द्वारा बताई गई 13 डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट में से डॉक्यूमेंट्स साथ लाएं.

सूत्रों के मुताबिक, बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी ऐसे ही नोटिस जारी किए जा रहे हैं या जल्द ही जारी किए जाएंगे. यह पहली बार है जब इस तरह का नोटिस जारी किया गया है. अक्टूबर 2025 में EC के SIR निर्देशों के अनुसार, 9 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के सभी रजिस्टर्ड वोटर्स को एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने थे, जिसमें खुद की या अपने माता-पिता या रिश्तेदारों की डिटेल्स देने के लिए कॉलम थे, जो 2000 के दशक की शुरुआत में हुए पिछले इंटेंसिव रिवीजन में वोटर के तौर पर रजिस्टर्ड थे.

अगर किसी वोटर का नाम पिछली वोटर लिस्ट से मैच नहीं होता तो ECI के निर्देशों के अनुसार, एक नोटिस जारी किया जाता और वोटर से एलिजिबिलिटी साबित करने के लिए डॉक्यूमेंट्स देने को कहा जाता है. चुनाव आयोग ने 16 दिसंबर को पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पब्लिश की, जिसमें 58 लाख नाम हटा दिए गए. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पब्लिश होने के बाद, पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा था कि 1.67 करोड़ और वोटर जांच के दायरे में हैं.

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