सगी नाबालिग बेटी से बार-बार दुष्कर्म, कोर्ट ने सुनाई आखिरी सांस तक कैद की सजा

नई दिल्ली : पिता-पुत्री के कलंकित करने वाले एक शर्मनाक मामले में दिल्ली में रोहिणी स्थित पॉक्सो कोर्ट ने सगी नाबालिग बेटी से बार-बार दुष्कर्म करने वाले पिता को पॉक्सो एक्ट की धारा छह के तहत ‘आखिरी सांस तक’ तक कैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आरोप है कि पत्नी द्वारा छोड़े जाने के बाद आरोपी ने नाबालिग बेटी के साथ हैवानियत शुरू कर दी थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत की अदालत ने आदेश में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पिता और पुत्री का रिश्ता सबसे पवित्र होता है, जिसे दोषी ने अपनी क्रूरता से न केवल खंडित किया बल्कि समाज की अंतरात्मा को भी झकझोर कर रख दिया।
इस मामले में पीड़िता की सगी बुआ को भी पॉक्सो एक्ट की धारा 21 (1) का दोषी करार दिया गया है, जिसने अपनी ही भतीजी के साथ हुई बर्बरता को छिपाने और मामले को दबाने का प्रयास किया था। हालांकि, उस पर दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी और पारिवारिक स्थिति को देखते हुए अदालत ने उसके प्रति नरमी बरतते हुए केवल 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पीड़िता को 10.5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक आदित्य कुमार ने दलील दी कि दोषी पिता ने पवित्र मानवीय संबंध को कलंकित किया है। वह किसी भी प्रकार की सहानुभूति का हकदार नहीं है। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपी के पहली बार अपराधी होने और जेल में अच्छे आचरण की दलील दी। अदालत ने इन तर्कों को खारिज कर दिया। अदालत ने सजा सुनाते समय पॉक्सो एक्ट की धारा 42 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि चूंकि पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अधिकतम दंड का प्रावधान है, इसलिए अदालत ने दोषी पिता को इसी धारा के तहत सजा सुनाई।
पीड़िता ने शिकायत में बताया था कि साल 2020 में उसकी मां के पुनर्विवाह के बाद 15 फरवरी 2021 की रात को पिता ने दुष्कर्म किया। फिर कई बार ऐसा किया। पीड़िता ने घटना की जानकारी अपनी बुआ को दी पर उसने मदद नहीं की। मई 2021 में पीड़िता ने ताई को बताया तब मामला खुला।



