
मणिकर्णिका पहुंचे सीएम योगी, निर्माण कार्यों का लिया जायजा
कहा, आस्था से खिलवाड़ नहीं, विकास से पीछे नहीं हटेंगे
घाट पर चल रहे कार्यों की मंडल आयुक्त एस राजलिंगम ने दी विस्तृत जानकारी, गुणवत्ता और समयसीमा पर सख्त निर्देश, कालभैरव और विश्वनाथ धाम में किया दर्शन-पूजन, कलभैरव व बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर प्रदेश के कल्याण की कामना
–सुरेश गांधी
वाराणसी : मणिकर्णिका घाट के विकास को लेकर चल रही सियासत और विवादों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को सीधे घाट पर पहुंचकर अपना रुख साफ कर दिया। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि काशी की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गरिमा से कोई समझौता नहीं होगा, लेकिन अव्यवस्था और अविकास को भी अब और ढोया नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गलत सूचना और दुष्प्रचार के जरिए भ्रम फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जाए और तथ्यों के साथ जनता को सही जानकारी दी जाए।
मुख्यमंत्री के मणिकर्णिका घाट पहुंचते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय दिखा। मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने उन्हें परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने घाट पर चल रहे कायाकल्प कार्यों, प्लेटफॉर्म विस्तार, अंतिम संस्कार से जुड़ी सुविधाओं और संरचनात्मक डिजाइन को बारीकी से देखा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों और निर्धारित समयसीमा में पूरे किए जाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं, डोम समाज और स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बताया गया कार्य सीएसआर फंड के माध्यम से किए जा रहे हैं। इनमें प्लेटफॉर्म का सुदृढ़ीकरण, ड्रेनेज व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, चेंजिंग रूम, वेस्ट मैनेजमेंट और श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। बताया गया कि बरसात और गंगा के जलस्तर बढ़ने के दौरान अंतिम संस्कार करने आए परिजनों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए परियोजना को वैज्ञानिक और इको-फ्रेंडली स्वरूप दिया गया है, ताकि गंगा की पवित्रता बनी रहे और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण न फैले।
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने मुख्यमंत्री को मणिकर्णिका घाट पर चल रहे कार्यों की तकनीकी, संरचनात्मक और पर्यावरणीय जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि परियोजना का उद्देश्य किसी भी धार्मिक परंपरा में हस्तक्षेप नहीं, बल्कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सम्मानजनक, सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में संपन्न कराना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मणिकर्णिका केवल एक घाट नहीं, बल्कि सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यहां हर दिन, हर क्षण जीवन और मृत्यु के दर्शन होते हैं। ऐसे स्थल पर अव्यवस्था, गंदगी और असुरक्षित हालात किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि निर्माण के दौरान धार्मिक मर्यादा, पौराणिक स्वरूप और स्थानीय परंपराओं का पूरी तरह ध्यान रखा जाए। सनातन परंपरा, धार्मिक गरिमा और श्रद्धालुओं की भावनाओं से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
पीएम के ‘विजन काशी’ का अहम हिस्सा है मणिकर्णिका घाट
मणिकर्णिका घाट का कायाकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विजन काशी’ का अहम हिस्सा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से सटे इस महाश्मशान तक पहुंचने के रास्ते अब तक संकरे, अव्यवस्थित और मूलभूत सुविधाओं से वंचित थे। अंतिम संस्कार के लिए समुचित प्लेटफॉर्म, जल निकासी, स्वच्छता और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का अभाव लंबे समय से महसूस किया जा रहा था। इसी को देखते हुए पहले चरण में 35 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के समय भी ऐसे ही आशंकाएं और अफवाहें फैलाई गई थीं, लेकिन आज वही कॉरिडोर काशी की पहचान बन चुका है। मणिकर्णिका घाट के विकास को लेकर भी सरकार पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है।

कालभैरव और बाबा विश्वनाथ के किए दर्शन
मणिकर्णिका घाट निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री कालभैरव मंदिर पहुंचकर विधिवत दर्शन-पूजन किया। इसके बाद वे काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि व कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी की पहचान उसकी आध्यात्मिक चेतना, गंगा और बाबा विश्वनाथ से है। सरकार का हर प्रयास इसी पहचान को सशक्त करने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में है।
संदेश साफ : विकास भी, विरासत भी
मुख्यमंत्री के दौरे से प्रशासनिक स्तर पर यह संदेश स्पष्ट हुआ कि सरकार मणिकर्णिका घाट सहित काशी के सभी धार्मिक स्थलों पर विकास और विरासत के संतुलन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का रुख साफ है. आस्था अक्षुण्ण रहेगी, पर अव्यवस्था नहीं चलेगी। मतलब साफ है मुख्यमंत्री का यह दौरा साफ संकेत देता है कि सरकार मणिकर्णिका घाट को उसकी ऐतिहासिक आत्मा के साथ आधुनिक सुविधाओं से लैस करना चाहती है। संदेश स्पष्ट है, काशी की आस्था भी बचेगी और विकास भी थमेगा नहीं।



