उत्तराखंड

सनातन की रक्षा शोरगुल से नहीं, शास्त्र से होती है: गीता प्रेस के मंच से बोले अमित शाह

ऋषिकेश। गीता भवन में गीता प्रेस की प्रतिष्ठित पत्रिका कल्याण के सौ वर्ष पूरे होने पर आयोजित शताब्दी अंक विमोचन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सनातन धर्म की भूमिका और गीता प्रेस के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सनातन की रक्षा न तो शोरगुल से होती है और न ही पैसों के प्रदर्शन से, बल्कि शास्त्र और सात्विक विचारों से ही यह संभव है।

गीता प्रेस मुनाफे के लिए नहीं, पीढ़ियों के निर्माण के लिए
अमित शाह ने कहा कि जो लोग भारत को समझते हैं, वे गीता प्रेस के मूल्यांकन को भी भली-भांति जानते हैं। गीता प्रेस किसी लाभ या प्रचार के लिए नहीं, बल्कि पीढ़ियों के संस्कार निर्माण के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सच्चे सात्विक संगठन कभी शोर या दिखावे से नहीं चलते।

जब धर्म को अंधविश्वास कहना फैशन था, तब गीता प्रेस डटी रही
गृह मंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब धर्म को अंधविश्वास कहना फैशन बन गया था। उस दौर में भी गीता प्रेस ने बिना किसी आक्रामक भाषा के, शालीनता और तर्क के साथ अपने विचार समाज के सामने रखे। गीता प्रेस ने कभी अपने महिमामंडन का प्रयास नहीं किया, बल्कि कर्म को ही अपनी पहचान बनाया।

दादी से पोती तक, गीता प्रेस से जुड़ी आस्था
अमित शाह ने भावुक उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी दादी गीता प्रेस से प्रकाशित श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ती थीं और आज उनकी पोती गीता प्रेस की हनुमान चालीसा अपने पास रखती है। यह गीता प्रेस की पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनी विश्वसनीयता और प्रभाव का प्रमाण है।

संस्थापकों ने जीवनभर निभाया सनातन का संकल्प
उन्होंने गीता प्रेस के संस्थापक जयदयाल गोयंदका और हनुमान प्रसाद पोद्दार के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन गीता प्रेस को समर्पित कर दिया। सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों पर गीता प्रेस की नींव रखी गई, जिसने बिना विकृति लाए आध्यात्मिक ज्ञान को समाज तक पहुंचाया।

बिना विज्ञापन, फिर भी अपार प्रभाव
अमित शाह ने महात्मा गांधी के उस सुझाव का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कल्याण पत्रिका में विज्ञापन प्रकाशित नहीं होने चाहिए। यही कारण है कि कल्याण आज भी शून्य विज्ञापन वाली पत्रिका है और बाजार के दबावों से पूरी तरह मुक्त रहकर आध्यात्मिक चेतना का कार्य कर रही है।

युवाओं की भागीदारी से दिखता है देश का उज्ज्वल भविष्य
गृह मंत्री ने कहा कि आज सनातन धर्म के प्रति युवाओं का आकर्षण और विश्वास लगातार बढ़ रहा है। कुंभ जैसे आयोजनों और धार्मिक पर्वों में युवाओं की बढ़ती सहभागिता इस बात का संकेत है कि देश पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है और भारत का भविष्य उज्ज्वल है।

राष्ट्रीय मुद्दों पर भी रखा पक्ष
अमित शाह ने कहा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया, केदारनाथ-बदरीनाथ सहित 35 से अधिक तीर्थ स्थलों में विकास कार्य चल रहे हैं। अंग्रेजों के समय देश से ले जाई गई 642 से अधिक मूर्तियों को वापस लाकर पुनः स्थापित किया गया है। साथ ही अब मातृ भाषा में शिक्षा का विरोध नहीं हो रहा, जो सांस्कृतिक आत्मविश्वास का संकेत है।

ये रहे मंच पर मौजूद
कार्यक्रम में जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरी, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, राजेंद्र दास महाराज, गोविंदानंद तीर्थ महाराज, ज्ञानानंद महाराज, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, डॉ. धन सिंह रावत, यमकेश्वर विधायक रेनू बिष्ट, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी सहित अनेक संत, जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button