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राहुल गांधी के ‘जी-राम-जी’ बयान पर BJP का पलटवार, कहा– राम विरोधी सोच

नई दिल्ली : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि कृषि कानून के मुद्दे पर किसानों ने एक साथ आकर सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया था। अगर हम मनरेगा(MNREGA) के मुद्दे पर एक साथ आ जाते हैं, तो यह सरकार फिर से झुकने को मजबूर हो जाएगी और मनरेगा फिर से लागू होगी। मनरेगा के बदले में जी राम जी योजना लेकर आई केंद्र सरकार को इन दिनों नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के तीखे हमलों का सामना करना पड़ रहा है। लोकसभा नेता विपक्ष ने जी राम जी योजना के आलोचकों को एक साथ आने और भाजपा के इस कानून का विरोध करने की अपील की है। इतना ही नहीं इस योजना के विरोध में आए राहुल गांधी ने यहां तक कह दिया कि उन्हें इसके नाम की जानकारी नहीं है, उन्हें नहीं पता कि आखिर यह ‘जी राम जी’ क्या है।

राहुल गांधी के इस बयान के सामने आने पर भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें भगवान राम का विरोधी करार दिया। दरअसल, इस योजना के समर्थकों के मुताबिक इस योजना में महात्मा गांधी का नाम हटाकर भगवान राम का नाम जोड़ा गया है, इसी वजह से कांग्रेस को इससे परेशानी हो रही है। भाजपा ने यह भी कहा कि राहुल गांधी जिस तरीके से इस योजना के नाम का विरोध कर रहे हैं, वह कांग्रेस की राम और सनातन विरोधी मानसिकता को उजागर कर रहे हैं।

इस योजना की शुरुआत से ही कांग्रेस पार्टी इसका विरोध करती नजर आ रही है। दिल्ली के जवाहर भवन में हुए एक सम्मेलन में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “यूपीए सरकार के समय आई मनरेगा योजना ने हर गरीब को रोजगार का अधिकार दिया था, इस अधिकार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खत्म करना चाहते हैं।”

इसके अलावा राहुल गांधी ने 2020 में संसद में पारित हुए विवादित कृषि कानूनों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “कुछ समय पहले किसानों ने सरकार को काले कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर किया था… अगर हम एकजुट हो जाएं, तो यह कायर हैं, मोदी जी पीछे हट जाएंगे और मनरेगा फिर से शुरू होगी।” राहुल के साथ मौजूद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस योजना को महात्मा गांधी की सार्वजनिक स्मृति का मिटाने का प्रयास बताया।

गौरतलब है कि राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय पर सामने आई हैं, जब विपक्ष जी राम जी योजना को लेकर सरकार पर दवाब बनाने की कोशिश कर रही है। कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी सरकार की इस योजना के संबंध में विरोध के संकेत मिले। कर्नाटक विधानसभा में आज राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य सरकार द्वारा तैयार भाषण पढ़ने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि इस भाषण में जी राम जी योजना की आलोचना की गई थी। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने भी कहा था कि उनकी सरकार ऐसा ही एक प्रस्ताव लेकर आएगी।

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