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राष्ट्रीय बालिका दिवस पर अमित शाह का संदेश, ‘लड़कियां जिम्मेदारी नहीं, ताकत हैं’

नई दिल्ली: राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह दिन इस बात का प्रतीक है कि लड़कियां सिर्फ समाज की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।

अमित शाह ने वीरांगनाओं का किया उल्लेख

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी को ‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ की शुभकामनाएं। राष्ट्रीय बालिका दिवस इस बात का प्रतीक है कि लड़कियां सिर्फ हमारी जिम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि सच्ची ताकत हैं। रानी लक्ष्मीबाई, रानी वेलु नचियार, मूला गभरू और प्रीतिलता वाडेदार के शानदार उदाहरण हर भारतीय के दिल को गर्व और प्रेरणा से भर देते हैं।”

महिला-नेतृत्व वाले विकास पर जोर

अमित शाह ने आगे कहा कि मोदी सरकार के महिला-नेतृत्व वाले विकास के मंत्र ने नारी शक्ति को विकास की धुरी बनाया है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं देश की प्रगति का नेतृत्व कर रही हैं और हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

योगी आदित्यनाथ बोले- बेटियां राष्ट्र की पहचान

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक्स पर लिखा, “आज ‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ के अवसर पर सभी माताओं-बहनों और भारत की बेटियों को हार्दिक बधाई व राष्ट्र निर्माण में उनके संघर्ष, समर्पण और सफलता का अभिनंदन। बेटियां वरदान हैं, हमारा अभिमान हैं और राष्ट्र की पहचान हैं।”

सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन के लिए प्रतिबद्ध सरकार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डबल इंजन की सरकार मातृशक्ति की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा और स्वावलंबन के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से नए प्रतिमान स्थापित कर रही हैं।

24 जनवरी को मनाया जाता है राष्ट्रीय बालिका दिवस

भारत में बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और समग्र कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।

2008 में हुई थी दिवस की शुरुआत

राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत साल 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य लड़के-लड़कियों के बीच भेदभाव के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समान अवसरों को प्रोत्साहित करना और ऐसा माहौल बनाना है, जहां बालिकाएं सशक्त नागरिक के रूप में आगे बढ़ सकें। यह पहल महिला-नेतृत्व वाले विकास और साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के विजन से भी जुड़ी हुई है।

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