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विश्व पुस्तक मेला 2026 में ‘प्रवासी कथामृत’ का भव्य लोकार्पण, भारतीय प्रवासी जीवन के अनुभवों को सहेजता अनूठा कथा-संग्रह

नई दिल्ली। प्रतिष्ठित विश्व पुस्तक मेला 2026 में शनिवार को बहुप्रतीक्षित कथा-संग्रह ‘प्रवासी कथामृत’ का औपचारिक लोकार्पण किया गया। यह संग्रह भारतीय प्रवासी समुदाय के विविध जीवन अनुभवों, संघर्षों और सांस्कृतिक यात्राओं को केंद्र में रखकर रचित कहानियों का एक सशक्त दस्तावेज माना जा रहा है। कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले के दौरान संपन्न हुआ, जहां साहित्य जगत की कई जानी-मानी हस्तियों की मौजूदगी रही।

डॉ विमला व्यास द्वारा संपादित, प्रवासी जीवन की अंतरंग झलक

प्रवासी कथामृत का संकलन और संपादन सुविख्यात लेखिका, शिक्षाविद एवं वैज्ञानिक डॉ विमला व्यास ने किया है। यह कथा-संग्रह प्रवास, पहचान, जड़ों से जुड़ाव और सांस्कृतिक एकीकरण जैसे विषयों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करता है। पुस्तक में दुनिया के अलग-अलग देशों में बसे भारतीयों के अनुभवों को कहानी के माध्यम से उकेरा गया है, जो पाठकों को प्रवासी जीवन की वास्तविकताओं से रूबरू कराता है।

विभिन्न पीढ़ियों और क्षेत्रों की आवाज़ों का समावेश

इस संग्रह की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग पीढ़ियों और भौगोलिक क्षेत्रों से जुड़े लेखकों की कहानियां शामिल हैं। बेहतर भविष्य की तलाश में देश छोड़कर विदेशों में बसे भारतीयों की चुनौतियां, सफलताएं, स्मृतियां और नई पहचान की जद्दोजहद इन कहानियों में साफ झलकती है। पुस्तक का आकर्षक कवर पेज और स्केच प्रसिद्ध कलाकार रविंद्र कुशवाहा द्वारा तैयार किए गए हैं, जबकि इसका प्रकाशन ‘सर्व भाषा ट्रस्ट’, नई दिल्ली ने किया है।

वरिष्ठ साहित्यकारों की गरिमामयी मौजूदगी

लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओम निश्चल रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सुश्री शशि सहगल और राव शिवराज प्रताप सिंह उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ प्रताप सहगल ने की। इसके अलावा अनेक प्रतिष्ठित लेखक, संपादक, प्रकाशक और साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल हुए, जिससे समारोह की गरिमा और बढ़ गई।

प्रवासी अनुभवों का प्रामाणिक दस्तावेज: ओम निश्चल

मुख्य अतिथि श्री ओम निश्चल ने अपने संबोधन में कथा-संग्रह की सराहना करते हुए कहा कि ‘प्रवासी कथामृत’ विश्व के विभिन्न देशों में बसे भारतीयों के संघर्ष, लचीलेपन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रामाणिक दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि यह संग्रह यह याद दिलाता है कि चाहे प्रवासी भारतीय दुनिया के किसी भी कोने में हों, उनकी जड़ें मातृभूमि और मातृभाषा से जुड़ी रहती हैं।

समकालीन साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान: डॉ प्रताप सहगल

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ प्रताप सहगल ने संपादक डॉ विमला व्यास की दूरदृष्टि की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के चुनिंदा लेखकों की विचारोत्तेजक कहानियों को एक सूत्र में पिरोकर यह संकलन तैयार किया गया है, जो पाठकों के मन को गहराई से स्पर्श करता है। उनके अनुसार यह पुस्तक भारतीय प्रवासी समुदाय की विकसित होती कहानी को संवेदनशीलता और अंतर्दृष्टि के साथ प्रस्तुत करती है।

‘यह केवल कहानियों का संग्रह नहीं’: डॉ विमला व्यास

संपादक डॉ विमला व्यास ने कहा कि ‘प्रवासी कथामृत’ केवल कहानियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह प्रवासी भारतीयों की जीवन यात्राओं का उत्सव है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक चुनौतियों से जूझने, स्मृतियों को संजोने और नई पहचान गढ़ने की प्रक्रिया को सामने लाती है और पाठकों को अपनेपन की सार्वभौमिक खोज पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

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