उत्तराखंड

चारधाम मार्ग पर जाम से मिलेगी राहत, रेल सुरंगें बनेंगी वैकल्पिक सड़क मार्ग; RVNL की बड़ी तैयारी

ऋषिकेश। चारधाम यात्रा के दौरान लगने वाले लंबे जाम और मानसून में बार-बार बंद होने वाले मार्गों से जल्द राहत मिल सकती है। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना के साथ-साथ गंगोत्री–यमुनोत्री के लिए प्रस्तावित रेल लाइन को भविष्य का गेम चेंजर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। योजना के तहत पहाड़ों में रेल लाइन के समानांतर बनने वाली सुरंगों का उपयोग सड़क सुरंगों के रूप में भी किए जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

रेलवे सुरंगों से गुजर सकेंगे यात्री वाहन
आरवीएनएल की रणनीति के अनुसार भविष्य में सुरंगों का निर्माण इस तरह किया जाएगा कि उनमें यात्री वाहन भी आसानी से चल सकें। इससे चारधाम मार्ग पर सड़क यात्रा करने वालों को तेज, सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी। इसी को लेकर करीब नौ घंटे चली मैराथन बैठक में आरवीएनएल के नवनियुक्त अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने अधिकारियों के साथ मौजूदा और प्रस्तावित परियोजनाओं पर विस्तृत मंथन किया।

ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना की गहन समीक्षा
सोमवार सुबह करीब नौ बजे आरवीएनएल के सीएमडी ऋषिकेश स्थित मुख्यालय पहुंचे। उनका देवप्रयाग तक ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना के निरीक्षण का कार्यक्रम प्रस्तावित था। इसके बाद शुरू हुई समीक्षा बैठक देर शाम तक चली। सीएमडी ने कहा कि सुरंग आधारित रेल परियोजनाएं उत्तराखंड के समग्र विकास में अहम भूमिका निभा सकती हैं और यह राज्य के लिए गेम चेंजर साबित होंगी।

दिसंबर 2028 से पहले परियोजना पूरी करने का लक्ष्य
मैराथन बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना को दिसंबर 2028 से पहले हर हाल में पूरा किया जाए। इसके लिए आपसी समन्वय और समयबद्ध कार्य को बेहद जरूरी बताया गया। बैठक में रेलवे सुरंगों को रोड सुरंग के रूप में इस्तेमाल करने की व्यवहारिकता, डिजाइन और सुरक्षा मानकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

तीन किमी से लंबी सुरंगों के साथ निकासी सुरंग अनिवार्य
ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन में तीन किलोमीटर से अधिक लंबी सभी सुरंगों के साथ निकासी सुरंग बनाई गई है। इन निकासी सुरंगों को सड़क मार्ग से जोड़ने की संभावनाओं पर भी मंथन हुआ। बैठक में यह चर्चा हुई कि मौजूदा परियोजना और भविष्य में प्रस्तावित गंगोत्री–यमुनोत्री रेल लाइन में सुरंगों को सड़क नेटवर्क से किस तरह जोड़ा जा सकता है।

चारधाम यात्रा के लिए मानसून में बनेगा वैकल्पिक मार्ग
गंगोत्री–यमुनोत्री के लिए रेल संचालन डोईवाला स्टेशन से प्रस्तावित है। सुरंगों की चौड़ाई बढ़ाने, समय और लागत के आकलन पर भी विस्तार से विचार किया गया। चारधाम यात्रा के दौरान मानसून में मलबा आने से सड़कें बार-बार बंद हो जाती हैं। ऐसे में इन रेल सुरंगों को वैकल्पिक सड़क मार्ग के रूप में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव बेहद अहम माना जा रहा है।

विदेशी विशेषज्ञों के साथ भी हुई विस्तृत चर्चा
सीएमडी सलीम अहमद ने परियोजना के चारों पैकेज से जुड़े विदेशी विशेषज्ञों और निर्माण कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ भी लंबी बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण के दौरान पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई हरित क्षेत्रों के विकास और व्यापक पौधारोपण के जरिए की जाएगी।

कर्णप्रयाग रेल लाइन के लिए 14 हजार पेड़ों का पातन
ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत करीब 14 हजार पेड़ों का पातन किया गया है। इसके सापेक्ष दोगुने पौधे लगाने के लिए वन विभाग को कैंपा मद के तहत धनराशि दी गई है। बैठक में आरवीएनएल के जीएम हेमेंद्र कुमार, पामीर अरोड़ा, सुमित जैन, एजीएम ओपी मालगुड़ी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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