देहरादून। देहरादून शहर को लंबे समय से जाम की समस्या से राहत दिलाने वाली आशारोड़ी से मोहकमपुर तक प्रस्तावित करीब 12 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड परियोजना पर काम तेज हो गया है। सड़क को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए अब जमीन की गहन जांच शुरू कर दी गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) द्वारा पिलरों की नींव तय करने के लिए जियो-टेक्निकल अध्ययन कराया जा रहा है, ताकि संरचना वर्षों तक सुरक्षित बनी रह सके।
पिलरों की मजबूती के लिए जमीन की गहराई तक जांच
एनएचएआइ के परियोजना निदेशक सौरभ सिंह के मुताबिक एलिवेटेड रोड के एलाइनमेंट में पहले किए गए बदलावों के बाद डीपीआर में भी संशोधन किया जा रहा है। इसी क्रम में पिलर निर्माण से पहले भू-तकनीकी अध्ययन को प्राथमिकता दी गई है। जांच में यह देखा जा रहा है कि जमीन में नरम मिट्टी कितनी गहराई तक है और हार्ड स्ट्राटा कहां मौजूद है, ताकि पिलरों की नींव उसी अनुरूप डिजाइन की जा सके।
पानी, भूकंप और ट्रैफिक लोड का भी होगा आकलन
ड्रिलिंग के जरिए यह भी जांच की जा रही है कि अलग-अलग स्थानों पर पानी कितनी गहराई पर है और उसका बहाव किस दिशा में है। अत्यधिक जलस्तर से नींव कमजोर न हो, इसके लिए यह अध्ययन जरूरी माना जा रहा है। साथ ही भूकंप और भारी वाहनों के दबाव का पिलरों पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आंकलन किया जा रहा है।
दो महीने में डीपीआर फाइनल, फिर टेंडर प्रक्रिया
परियोजना निदेशक के अनुसार अगले दो महीनों में जियो-टेक्निकल अध्ययन पूरा कर डीपीआर को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इसके बाद स्वीकृति लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
एलाइनमेंट में किए गए अहम बदलाव
निर्माण के दौरान रिस्पना पुल जंक्शन पर ट्रैफिक व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए इस क्षेत्र को बाईपास करने का फैसला लिया गया है। रिस्पना पुल की अत्यधिक व्यस्तता को देखते हुए एलिवेटेड रोड के पिलर रेलवे ट्रैक के साथ-साथ आगे बढ़ाए जाएंगे।
इसके अलावा पहले एलिवेटेड रोड को मोहकमपुर रेलवे ओवरब्रिज से जोड़ने की योजना थी, लेकिन अब इसे उससे पहले केंद्रीय विद्यालय आईआईपी क्षेत्र से शुरू किया जाएगा, ताकि स्कूल के आसपास बच्चों को सड़क पार करने में खतरा न हो।
कुछ हिस्सों में एलिवेटेड रोड की जगह फ्लाईओवर
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एनएचएआइ के प्रस्तावित बदलावों को मंजूरी दे दी है। नए प्रावधान के तहत 12 किलोमीटर पूरे हिस्से में एकमुश्त एलिवेटेड रोड की जगह कुछ स्थानों पर फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। आइएसबीटी से आशारोड़ी तक का हिस्सा पूरी तरह एलिवेटेड रोड से कवर होगा, जबकि मोहकमपुर से अजबपुर के बीच जगह की उपलब्धता के अनुसार फ्लाईओवर बनाए जाएंगे।
रिस्पना पुल पर रोज 40 हजार से ज्यादा वाहन
एनएचएआइ अधिकारियों के अनुसार रिस्पना पुल से प्रतिदिन 40 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। यदि पुराने प्लान के मुताबिक इसी हिस्से में निर्माण होता तो ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती। इसी वजह से इस सेक्शन को रेलवे ट्रैक के किनारे से ले जाने का निर्णय लिया गया।
1500 करोड़ रुपये की परियोजना, जाम से मिलेगी बड़ी राहत
करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना में भूमि अधिग्रहण की लागत भी शामिल है। सहारनपुर–देहरादून–हरिद्वार रोड पर आइएसबीटी से मोहकमपुर तक बीते एक दशक में घनी आबादी बस चुकी है। अंडरपास की कमी और स्थानीय व राजमार्ग यातायात के टकराव से रोज जाम की स्थिति बनती है। एलिवेटेड रोड बनने के बाद हाईवे ट्रैफिक और स्थानीय यातायात अलग-अलग स्तर पर संचालित हो सकेगा, जिससे शहर को स्थायी रूप से जाम से निजात मिलने की उम्मीद है।
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