एलन मस्क की चेतावनी, बोले- 30–36 महीने में पृथ्वी के लिए चुनौती बन सकती है AI की ऊर्जा खपत

वाशिंगटन : अरबपति उद्यमी एलन मस्क ने हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है। मस्क का कहना है कि अगले दो से तीन साल के भीतर एआई की ऊर्जा खपत इतनी बढ़ जाएगी कि पृथ्वी की ऊर्जा संरचना इसे संभालने में सक्षम नहीं रहेगी। उन्होंने तर्क दिया कि इस चुनौती का समाधान केवल अंतरिक्ष में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना हो सकता है। उनका कहना है कि सोलर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग के कारण अंतरिक्ष में बड़े पैमाने पर AI सिस्टम संचालित करना धरती की तुलना में आसान होगा।
एक पॉडकास्ट के दौरान मस्क ने कहा कि एआई क्षेत्र की सबसे बड़ी सीमा बिजली की खपत है। अमेरिका औसतन लगभग आधा टेरावाट बिजली उपयोग करता है और इसे दोगुना करना राजनीतिक और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। इसके विपरीत, पृथ्वी की कक्षा में लगाए गए सौर पैनल निरंतर सूर्य की रोशनी प्राप्त करते हैं और वायुमंडलीय नुकसान से मुक्त रहते हैं, जिससे ये पैनल धरती पर मौजूद पैनलों की तुलना में कई गुना अधिक ऊर्जा उत्पन्न कर सकते हैं।
मस्क ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे सैटेलाइट लॉन्च की लागत और अंतरिक्ष में लोगों को ले जाने का खर्च कम होगा, वैसे ही ऑर्बिटल AI इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार संभव होगा। उनका मानना है कि भविष्य की कंप्यूटिंग क्षमताओं के लिए अंतरिक्ष ही सबसे उपयुक्त स्थान होगा। मस्क की कंपनी स्पेसएक्स पहले ही रॉकेट लॉन्चिंग और रियूजिबल रॉकेट्स के माध्यम से अंतरिक्ष में टेक्नोलॉजी को किफायती बनाने पर काम कर रही है।
मस्क का दावा है कि यदि मानव केवल पृथ्वी पर ही सीमित रहेंगे, तो तकनीकी रूप से हमारी क्षमताएं सीमित रहेंगी और एआई का अगला प्रयोग भी बाधित हो सकता है। उनका अनुमान है कि कुछ ही वर्षों में अंतरिक्ष में लगाए जाने वाले एआई सिस्टम की कंप्यूटिंग क्षमता, धरती पर वर्तमान में लगाए जा रहे सिस्टम से भी अधिक हो जाएगी।
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में एआई डेटा सेंटरों की भारी ऊर्जा खपत पर गंभीर चर्चा चल रही है। अमेरिकी व्यापारिक मामलों के मंत्री ने भी सवाल उठाया था कि भारत और चीन जैसे देशों में AI चलाने की लागत क्यों अमेरिका को वहन करनी पड़ रही है। इन डेटा सेंटरों में बड़ी मात्रा में बिजली खर्च होती है, जो वैश्विक ऊर्जा और पर्यावरण पर असर डाल सकती है।



