लखनऊ/हरिद्वार: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरिद्वार में आयोजित संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब पिछड़े राज्यों की श्रेणी से बाहर निकलकर देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन चुका है। उन्होंने कहा कि बेहतर कानून-व्यवस्था और सशक्त शासन की बदौलत यूपी आज दंगे, फसाद और कर्फ्यू के दौर से निकलकर विकास के नए पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
हरिद्वार से यूपी की बदली तस्वीर का जिक्र
भारत माता मंदिर, सप्त सरोवर रोड स्थित सप्तऋषि आश्रम ग्राउंड में आयोजित संत सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब अराजकता का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश में अब न दंगे हैं, न कर्फ्यू और न ही गुंडागर्दी। यही वजह है कि आज यूपी विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का केंद्र बन रहा है।
बद्रीनाथ और केदारनाथ राष्ट्र चेतना के केंद्र
सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये राष्ट्र चेतना के मूल केंद्र बिंदु भी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को इन्हीं स्थलों से शक्ति और दिशा मिलती है। इन पवित्र धामों की विरासत का सम्मान और संरक्षण करने का सकारात्मक परिणाम आज देश और राज्यों के विकास में दिखाई दे रहा है।
बीमारू राज्य से आर्थिक शक्ति बनने की यात्रा
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय बीमारू राज्य की श्रेणी में गिना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी सफलता की मिसाल बन चुका है। उन्होंने कहा कि यूपी निरंतर प्रगति के नए रास्तों पर आगे बढ़ रहा है और यह बदलाव सुशासन और सुरक्षा के मजबूत ढांचे का परिणाम है।
देश में व्यापक परिवर्तन का दौर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखंड की धरती पर आकर संत सम्मेलन में भाग लेना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के भीतर व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं। यह वह निर्माण गाथा है, जिसका भारत सदियों से इंतजार कर रहा था।
भारत केवल भूखंड नहीं, शाश्वत चेतना है
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह ऋषि परंपरा की शाश्वत चेतना का केंद्र है। यहां की संस्कृति केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण जीवन दर्शन है, जो समाज और राष्ट्र को दिशा देता है।
भारत किसी एक सत्ता की देन नहीं
सीएम योगी ने कहा कि भारत का निर्माण किसी एक तिथि या सत्ता के कारण नहीं हुआ है। सनातन चेतना ही भारत का स्वाभाविक प्रवाह है। इसी चेतना का प्रतिबिंब सुप्रीम कोर्ट के ध्येय वाक्य ‘यतो धर्म: ततो जय:’ में भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि धर्म कभी कमजोर नहीं होता, बल्कि उसे जानबूझकर कमजोर करने का प्रयास किया जाता है।
वैदिक भारत आत्मनिर्भर सभ्यता का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो राष्ट्र अपनी सभ्यता और संस्कृति की उपेक्षा करता है, वह न वर्तमान को सुरक्षित रख पाता है और न भविष्य को संजो पाता है। वैदिक भारत आत्मनिर्भर सभ्यता का प्रतीक रहा है। आक्रांताओं के आगमन से पहले भारत एक पूर्ण विकसित और सशक्त संस्कृति वाला राष्ट्र था, जो ऋषियों की तपस्या, किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से खड़ा हुआ।
संत सनातन चेतना के जीवंत प्रतीक
इस संत सम्मेलन में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, आध्यात्मिक गुरु स्वामी अवधेशानंद गिरि और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गंगा के पवित्र तट पर सप्तऋषि क्षेत्र में एकत्र सभी संत, आध्यात्मिक नेता और श्रद्धालु सनातन चेतना के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जिन महान विभूतियों ने अपना जीवन सेवा, त्याग और राष्ट्रीय कर्तव्य को समर्पित किया, वे केवल तपस्वी नहीं बल्कि राष्ट्र चेतना से जुड़े दिव्य संत थे।




