उत्तर प्रदेश

यूपी के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार, 1960 के बाद पहली बार प्रदेश भर में MSME का होगा व्यापक विस्तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को मजबूती देने के लिए प्रस्तावित सरदार वल्लभ भाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र जोन योजना को राज्य के औद्योगिक विकास की दिशा में गेमचेंजर माना जा रहा है। इस योजना के तहत वर्ष 1960 के बाद पहली बार प्रदेश के सभी जिलों में 50 से 100 एकड़ तक के औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।

भूमि बैंक सबसे बड़ी चुनौती
एमएसएमई विभाग पिछले वर्ष से ही इस महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू करना चाहता था, लेकिन सभी जिलों में उपयुक्त भूमि उपलब्ध न होने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को भूमि बैंक तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। माना जा रहा है कि आगामी बजट में इस योजना के लिए बड़ी धनराशि का प्रावधान किया जा सकता है, क्योंकि औद्योगिक विकास से जुड़ी इस योजना पर सरकार की खास नजर है।

युवाओं और उद्यमियों को मिलेगा सीधा लाभ
पिछले वर्ष सरकार ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान योजना के तहत 1,000 करोड़ रुपये का बजट रखा था। इस योजना में युवाओं को अपना उद्यम शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का ऋण दिया जा रहा है। हालांकि, 13 माह में अब तक 1.38 लाख युवाओं को ही ऋण मिल सका है।
इसी तरह, लघु उद्योग क्लस्टर विकास योजना में 115 करोड़ रुपये के मुकाबले अभी तक केवल करीब 10 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि योजनाएं तो हैं, लेकिन जमीन और क्रियान्वयन बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

प्रदेश में MSME की ताकत
उत्तर प्रदेश में इस समय करीब 96 लाख MSME इकाइयां हैं, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। प्रस्तावित औद्योगिक जोन इन इकाइयों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सृजन और निवेश के नए अवसर उपलब्ध कराएंगे।

आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में दिखी मजबूती
राज्य की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार:

  • वर्ष 2025 में विभिन्न योजनाओं के तहत निवेशकों को 4,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया।
  • वर्ष 2016-17 में प्रदेश में 14,169 कारखाने पंजीकृत थे, जो नवंबर 2024 तक बढ़कर 30,695 हो गए।
  • राज्य का निर्यात 0.84 लाख करोड़ रुपये (2016-17) से बढ़कर 1.86 लाख करोड़ रुपये (2024-25) तक पहुंच गया।
  • ODOP योजना के तहत अब तक 890.44 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वितरित की जा चुकी है।

औद्योगिक विकास की नई उड़ान
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भूमि बैंक की समस्या का समाधान हो जाता है और योजना को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो यह पहल न सिर्फ MSME सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि प्रदेश में रोजगार, निवेश और निर्यात को भी मजबूत आधार देगी।

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