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ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी- ‘परमाणु समझौते पर राजी हो, नहीं तो होंगे ‘बहुत दर्दनाक परिणाम’

न्यूयार्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने परमाणु समझौते (न्यूक्लियर डील) पर सहमति नहीं दी, तो उसे “बहुत दर्दनाक” परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने यह बयान इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ वॉशिंगटन में हुई बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया। उन्होंने बैठक को “बहुत अच्छा” बताया और कहा कि ईरान के साथ समझौता करना जरूरी है।

“डील करनी ही होगी, नहीं तो हालात गंभीर होंगे”
ट्रंप ने कहा, “हमें एक समझौता करना ही होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हालात बहुत गंभीर हो जाएंगे। मैं ऐसा नहीं चाहता, लेकिन हमें डील करनी होगी। उन्हें पहली बार ही समझौता कर लेना चाहिए था, लेकिन उन्होंने नहीं किया और उन्हें ‘मिडनाइट हैमर’ झेलना पड़ा। अगर अब भी वे डील नहीं करते हैं, तो यह ईरान के लिए बहुत दर्दनाक होगा।”

यहां ट्रंप ने “Midnight Hammer” का जिक्र किया, जो जून 2025 में अमेरिका द्वारा ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों को संदर्भित करता है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करता, तो स्थिति अलग दिशा में जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम फैसला उन्हीं के हाथ में है।

नेतन्याहू बोले – ट्रंप की शर्तों से ईरान मान सकता है
बैठक के बाद इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी मीडिया से बातचीत की। मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रूज से इजराइल रवाना होते समय उन्होंने कहा कि यह दौरा छोटा लेकिन महत्वपूर्ण था। उन्होंने कहा, “मैंने अपने अच्छे दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की। हमारे बीच करीबी, सच्चे और खुले संबंध हैं।”

नेतन्याहू ने बताया कि बातचीत का मुख्य फोकस ईरान था, लेकिन अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। उनके अनुसार, ट्रंप का मानना है कि ईरान अब समझ चुका है कि वह किससे बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप की सख्त शर्तें और पिछली बार समझौता न करने की गलती को लेकर ईरान की समझ, उसे इस बार एक “अच्छे समझौते” के लिए राजी कर सकती है।

नेतन्याहू की शंका बरकरार
हालांकि नेतन्याहू ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें ईरान के साथ किसी समझौते की संभावना को लेकर सामान्य रूप से संदेह है। उन्होंने कहा कि उन्होंने व्हाइट हाउस को साफ कर दिया है कि कोई भी समझौता सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों (प्रॉक्सी) की गतिविधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए। नेतन्याहू का मानना है कि यह शर्तें सिर्फ इजराइल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण हैं।

गाजा पर भी हुई चर्चा
नेतन्याहू ने बताया कि ट्रंप के साथ “उत्कृष्ट बातचीत” में गाजा की स्थिति पर भी चर्चा हुई। उन्होंने ट्रंप को इजराइल का “महान मित्र” और “अलग तरह का राष्ट्रपति” बताया।

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