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बांग्लादेश में छात्र राजनीति बवाल: बीएनपी ने कई विश्वविद्यालयों में किया कब्जा, विरोधियों को हॉस्टल से निकाला

ढाका: बांग्लादेश में संसदीय चुनावों के बाद राजनीतिक तनाव तेज हो गया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की भारी जीत के बाद छात्र राजनीति में भी उथल-पुथल बढ़ गई है। बीएनपी की छात्र इकाई जतियोताबादी छात्र दल के कार्यकर्ताओं ने कई प्रमुख विश्वविद्यालयों के कैंपस और हॉस्टलों पर कब्जा कर लिया है और दूसरे राजनीतिक दलों के समर्थकों को जबरन बाहर निकाला है।

कैंपस पर बीएनपी का कब्जा और विरोध

घटनाओं की रिपोर्ट में बताया गया है कि ढाका यूनिवर्सिटी, राजशाही यूनिवर्सिटी और जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी में बीएनपी समर्थक छात्रों ने हॉस्टलों में तालाबंदी कर दी। विरोध करने वाले छात्रों के सामान बाहर फेंके गए और कई जगहों पर उन पर हमले भी किए गए। एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “रातों-रात हमारे हॉस्टल से निकाल दिया गया। अब कैंपस में केवल बीएनपी समर्थक ही रहेंगे।”

बीएनपी ने आरोप खारिज किए

बीएनपी नेतृत्व ने हॉस्टलों और कैंपस पर कब्जे के आरोपों को अस्वीकार किया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम ‘सुरक्षा और व्यवस्था’ बनाए रखने के लिए उठाया गया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “पिछले शासन में छात्र लीग (अवामी लीग की छात्र इकाई) ने कैंपस पर आतंक मचाया था। अब हम शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित कर रहे हैं।”

जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई ने किया विरोध

वहीं, जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई इस्लामी छात्र शिबिर ने इस कार्रवाई को ‘फासीवादी कदम’ बताया और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी। यह घटनाक्रम 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन की अस्थिरता को दोबारा दर्शाता है, जब शेख हसीना का शासन गिरा था और छात्र लीग के सदस्यों को कैंपस से बाहर निकाला गया था। अब सत्ता परिवर्तन के बाद बीएनपी छात्र दल वही रणनीति अपना रहा है।

पुलिस हस्तक्षेप और हिंसा

कई विश्वविद्यालयों में पुलिस ने हस्तक्षेप किया, लेकिन हिंसा के दौरान दर्जनों लोग घायल हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कैंपस पर राजनीतिक नियंत्रण की लड़ाई है, जो बीएनपी की नई सरकार के सामने चुनौतियों को बढ़ा सकती है। फरवरी 2026 के चुनाव में बीएनपी की 212 सीटों पर जीत और जमात-ए-इस्लामी की 76 सीटों के साथ बढ़ते तनाव ने छात्र राजनीति में उथल-पुथल पैदा कर दी है। कई विश्वविद्यालयों में परीक्षाएं स्थगित करने की मांग उठ रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने हिंसा पर चिंता जताई है।

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