प्रमोद भगत ने रचा इतिहास, लिन डैन को पीछे छोड़ बने सबसे सफल एकल खिलाड़ी

मनामा: भारत के स्टार पैरा शटलर प्रमोद भगत ने एक बार फिर विश्व मंच पर तिरंगा लहरा दिया। शनिवार को बीडब्ल्यूएफ पैरा विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में उन्होंने इंडोनेशिया के मोहम्मद अल इमरान को सीधे गेमों में हराकर पुरुष एकल एसएल3 वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 37 वर्षीय भगत ने फाइनल मुकाबले में 21-12, 21-18 से जीत दर्ज करते हुए अपने दबदबे को कायम रखा।
लगातार चौथा स्वर्ण, कुल छठा विश्व खिताब
यह विश्व चैंपियनशिप में उनका लगातार चौथा एकल स्वर्ण है, जबकि एसएल3 वर्ग में यह उनका कुल छठा विश्व खिताब है। एसएल3 वर्ग में वे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं जिनके निचले अंगों में गंभीर दिव्यांगता होती है। भगत की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके करियर का स्वर्णिम अध्याय है, बल्कि पैरा बैडमिंटन इतिहास में एक नई मिसाल भी है।
पोलियो से विश्व विजेता तक का सफर
पांच साल की उम्र में पोलियो से प्रभावित हुए प्रमोद भगत ने संघर्षों को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने 2009, 2015, 2019, 2022 और 2024 में विश्व चैंपियनशिप के एकल स्वर्ण पदक जीते थे। अब इस जीत के साथ उन्होंने कुल छह विश्व खिताब अपने नाम कर लिए हैं।
लिन डैन को पीछे छोड़ा, रचा कीर्तिमान
इस ऐतिहासिक जीत के साथ भगत ने चीन के दिग्गज Lin Dan को भी पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने सक्षम (एबल बॉडी) बैडमिंटन में पुरुष एकल के पांच विश्व खिताब जीते थे। इसके साथ ही भगत विश्व चैंपियनशिप इतिहास में खेल के सबसे सफल एकल खिलाड़ी बन गए हैं।
निलंबन के बाद दमदार वापसी
यह खिताब भगत के लिए खास मायने रखता है क्योंकि उन पर बैडमिंटन विश्व महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) के डोपिंग रोधी नियम के तहत वेयरअबाउट्स नियम के उल्लंघन के कारण 18 महीने का निलंबन लगाया गया था। इसी कारण वे 2024 पेरिस पैरालंपिक में हिस्सा नहीं ले सके थे। हालांकि वापसी के बाद उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी सवालों का जवाब दिया।
युगल में भी गोल्ड, भारत का दमदार प्रदर्शन
प्रमोद भगत ने सुकांत कदम के साथ पुरुष युगल एसएल3-एसएल4 वर्ग का खिताब भी जीता। फाइनल में उन्होंने हमवतन जे दिल्ली और एन शिवकुमार की जोड़ी को 21-19, 21-16 से पराजित किया। इस तरह भारत ने इस चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
महिला एकल एसयू5 वर्ग में भारत की शीर्ष वरीय एम रामदास को फाइनल में चीन की यांग किउ शिया से 11-21, 11-21 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं महिला एकल एसएच6 वर्ग में शीर्ष वरीय एन सुमति सिवान भी उपविजेता रहीं। उन्हें चीन की ली फेंग के खिलाफ 14-21, 21-12, 17-21 से शिकस्त झेलनी पड़ी।
पैरा बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में भारत ने कुल 15 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया
गोल्ड – 2
सिल्वर – 5
ब्रॉन्ज़ – 8
कुल – 15 पदक
गोल्ड मेडलिस्ट
एमएस एसएल3 – प्रमोद भगत
एमडी एसएल3-एसएल4 – प्रमोद भगत / सुकांत कदम
सिल्वर मेडलिस्ट
एमएस एसएल4 – नवीन शिवकुमार
डब्ल्यूएस एसयू5 – मनीषा रामदास
डब्ल्यूएस एसएच6 – निथ्या श्री सुमति सिवन
एक्सडी डब्ल्यूएच1-डब्ल्यूएच2 – प्रेम एले / अल्फिया जेम्स
एमडी एसएल3-एसएल4 – नवीन शिवकुमार / जगदीश दिल्ली
ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट
एमएस एसएल3 – नितेश कुमार
एमएस एसएल4 – सुकांत कदम
डब्ल्यूएस एसयू5 – तुलसीमथी मुरुगेसन
एमएस एसएच6 – कृष्णा नगर
एमडी एसएल3-एसएल4 – सूर्यकांत यादव / उमेश विक्रम कुमार
डब्ल्यूडी एसएल3-एसयू5 – मानसी जोशी / तुलसीमथी मुरुगेसन
एक्सडी एसएल3-एसयू5 – चिराग बरेठा / मंदीप कौर
एक्सडी एसएच6 – कृष्णा नगर / निथ्या श्री सुमथी सिवन
भारतीय पैरा बैडमिंटन के लिए यह ऐतिहासिक और गर्व का क्षण है। विश्व मंच पर खिलाड़ियों के इस दमदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत पैरा स्पोर्ट्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।



