उत्तर प्रदेशराज्यवाराणसी

ढोल-नगाड़ों पर थिरकी काशी, शिव-विवाह के उत्सव में उमड़ा जनसैलाब

भूत-प्रेत, देव-गण और बारातियों संग निकले भोलेनाथ, रात ढलते ही वाराणसी की गलियां बनीं कैलाश का आंगन, डीजे-बैंड, झांकियों और पुष्पवर्षा के बीच निकली शिवबारात, हर चौक-चौराहे पर उमड़ी आस्था की लहर

सुरेश गांधी

वाराणसी : महाशिवरात्रि की रात काशी सचमुच लोक और परलोक के अद्भुत संगम में बदल गई। जैसे ही विभिन्न मोहल्लों और मंदिरों से शिवबारात निकली, पूरा शहर उत्सव और श्रद्धा की धड़कनों से गूंज उठा। गली-गली से गुजरती बारात में भगवान भोलेनाथ दूल्हे के स्वरूप में विराजमान थे और भक्त बाराती बनकर ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे की धुन पर झूमते हुए आगे बढ़ रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं कैलाश पर्वत से शिवगण काशी की धरती पर उतर आए हों। जुलूस के मार्ग पर हर मोड़ पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। छतों और बालकनियों से महिलाएं और बच्चे पुष्पवर्षा कर भोलेनाथ का स्वागत करते नजर आए। कई स्थानों पर युवाओं ने पारंपरिक नृत्य और आधुनिक संगीत के संगम से शिवभक्ति का अनोखा रंग प्रस्तुत किया। शिवगणों की वेशभूषा में सजे कलाकारों ने भूत-प्रेत, गण और साधु-संतों का रूप धारण कर बारात को जीवंत और आकर्षक बना दिया।

जैसे-जैसे बारात आगे बढ़ती गई, “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से वातावरण गूंजता रहा। श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था और उत्साह का अद्भुत समागम देखने को मिला। कई स्थानों पर सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय लोगों द्वारा भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिससे पूरी रात श्रद्धा और सेवा का संगम दिखाई दिया। मतलब साफ है शिवबारात केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि काशी की जीवंत सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव बनकर सामने आई। मोहल्लों से निकलकर मुख्य मार्गों तक पहुंची इस बारात ने सामाजिक एकता और लोक परंपरा की झलक भी दिखाई। महिलाएं मंगल गीत गाती रहीं तो युवा नृत्य करते हुए शिवभक्ति में लीन दिखाई दिए।

भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। जुलूस मार्ग पर सुरक्षा घेरा, यातायात नियंत्रण और स्वयंसेवकों की सक्रियता से व्यवस्था सुचारु बनी रही। बावजूद इसके श्रद्धालुओं का उत्साह इतना प्रबल रहा कि देर रात तक शहर की गलियां शिव-विवाह के उत्सव में सराबोर रहीं। महाशिवरात्रि की यह शिवबारात काशी के जनमानस के लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, संस्कृति और लोकआस्था का जीवंत उत्सव बनकर उभरी, जिसने हर हृदय को शिवमय कर दिया।

Related Articles

Back to top button