बिहार

सिर्फ शराब मिलने से जब्त नहीं होगी जमीन, पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला

पटना। शराबबंदी कानून के तहत जमीन जब्ती को लेकर पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि किसी परिसर से अवैध शराब मिलने भर से जमीन या मकान जब्त नहीं किया जा सकता। जब्ती की कार्रवाई के लिए मकान मालिक की प्रत्यक्ष संलिप्तता या मिलीभगत साबित करना जरूरी है।

अदालत ने रद्द की जब्ती कार्रवाई

यह फैसला न्यायाधीश मोहित कुमार शाह और न्यायाधीश आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने सिविल रिट याचिका संख्या 16759/2025 की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने नवादा निवासी दयामंती देवी की जमीन को डी-सील करने और जब्ती की कार्रवाई रद्द करने का आदेश दिया।

नवादा से जुड़ा है पूरा मामला

मामला नवादा जिले के उत्पाद थाना कांड संख्या 873/2024 से संबंधित है। 13 दिसंबर 2024 को पुलिस ने दो आरोपितों रंजीत कुमार और राहुल कुमार उर्फ छोटू के पास से 1.500 लीटर अवैध विदेशी शराब बरामद की थी।

इसके अलावा याचिकाकर्ता की घेराबंदी वाली जमीन में कचरे के बीच छिपाकर रखी गई बोरी से 2.625 लीटर शराब भी मिली थी। इसके आधार पर जिला प्रशासन ने जमीन को सील कर जब्ती प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

मालिक का आरोपितों से कोई संबंध नहीं

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि मामले में न तो जमीन मालकिन और न ही उनके किसी परिजन को अभियुक्त बनाया गया। साथ ही जिन आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई, उनसे उनका कोई संबंध या परिचय नहीं है।

कोर्ट ने दिए अहम निर्देश

सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि जमीन की मालकिन का आरोपितों से कोई संबंध या घटना में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता थी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ परिसर से कम मात्रा में शराब मिलने से मालिक की भूमिका स्वतः सिद्ध नहीं हो जाती।

कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस प्रमाण के संपत्ति सील करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 300ए का उल्लंघन है। इसके साथ ही राज्य अधिकारियों को स्वामित्व की पुष्टि के बाद दो सप्ताह के भीतर जमीन डी-सील कर मुक्त करने का निर्देश दिया।

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