उत्तर प्रदेशराज्य

यूपी मत्स्य विभाग में भ्रष्टाचार पर बड़ा एक्शन, कानपुर मंडल के 10 अधिकारी-कर्मचारी हटाए गए, एक निलंबित

लखनऊ से बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना और निषादराज बोट योजना में सामने आए भ्रष्टाचार और गंभीर लापरवाही के मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। जांच के बाद कानपुर मंडल के 10 अधिकारी-कर्मचारियों को हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि एक मत्स्य निरीक्षक को निलंबित किया गया है।

उपनिदेशक समेत पूरे मंडलीय स्टाफ पर गिरी गाज
कार्रवाई की जद में कानपुर मंडल की उपनिदेशक सुनीता वर्मा भी शामिल हैं। मंडलीय कार्यालय और सहायक निदेशक मत्स्य, कानपुर कार्यालय में तैनात प्रथम श्रेणी से चतुर्थ श्रेणी तक के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। वहीं सहायक निदेशक कार्यालय में तैनात मत्स्य निरीक्षक सुनील कुमार को निलंबित कर दिया गया है।

योजनाओं में गड़बड़ी, डीबीटी और फोटोग्राफ में सामने आया फर्जीवाड़ा
विभागीय जांच में पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत चयनित लाभार्थी मनोज कुमार कश्यप की डीबीटी पोर्टल पर अपलोड कर दी गई, जबकि जिस तालाब का फोटोग्राफ लगाया गया था, वह अभी तक लाभार्थी के नाम आवंटित ही नहीं हुआ था।

निजी भूमि पर चयन कर समिति को किया गया गुमराह
इसी तरह राम कुमार नामक आवेदक का चयन निजी भूमि पर बने तालाब के आधार पर कराया गया। जांच में सामने आया कि जिला स्तरीय चयन समिति को गुमराह किया गया, जबकि नियमों के अनुसार केवल पट्टाधारक को ही योजना का लाभ दिया जाना चाहिए था।

निषादराज बोट योजना में भुगतान में अनियमितता
निषादराज बोट योजना के तहत तीरथ सिंह, उमा शंकर निषाद और पप्पू के भुगतान मामलों में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। पोर्टल पर अपलोड किए गए बिल और जारी किए गए बिलों में अंतर पाया गया। इसके अलावा प्रमाण पत्रों में खामियां और कार्यालयीय अभिलेखों की गोपनीयता भंग करने के आरोप भी लगे हैं।

फीड मिल भुगतान लंबित, मुख्यालय के आदेशों की अनदेखी
जांच में यह भी सामने आया कि लाभार्थी सविता निषाद की फीड मिल की प्रथम किस्त का भुगतान लंबे समय से लंबित है। उपनिदेशक कार्यालय पर मुख्यालय के पत्रों का जवाब न देने और 13 फरवरी को लखनऊ में बुलाई गई समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने के आरोप भी लगे हैं।

मत्स्य मंत्री के निर्देश पर निलंबन की कार्रवाई
इन सभी मामलों को गंभीर मानते हुए संजय निषाद ने सहायक निदेशक का प्रभार संभाल रहे मत्स्य निरीक्षक सुनील सिंह को निलंबित करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद विभागीय स्तर पर व्यापक कार्रवाई की गई।

कई अधिकारी मुख्यालय से अटैच, नए प्रभार सौंपे गए
मुख्यालय से संबद्ध किए गए अधिकारियों में उपनिदेशक कार्यालय के अपर सांख्यिकीय अधिकारी केसी वर्मा, उर्दू अनुवादक सह वरिष्ठ सहायक आयशा खातून, कनिष्ठ सहायक अमरीश अवस्थी, सहायक निदेशक कार्यालय की वरिष्ठ सहायक प्रतिमा उमराव, कनिष्ठ सहायक सोहन लाल व प्रबल कुमार, मछुआ सतीश निषाद और अजय सिंह शामिल हैं। वहीं लखनऊ मंडल की उपनिदेशक सृष्टि यादव को कानपुर मंडल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सहायक निदेशक मत्स्य बुलंदशहर जितेंद्र कुमार को कानपुर मंडल के सभी जिलों का आहरण-वितरण अधिकारी बनाया गया है।

जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त संदेश
मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने साफ कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। कानपुर मंडल से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। प्रारंभिक जांच में मत्स्य निरीक्षक सुनील कुमार की भ्रष्टाचार में संलिप्तता सामने आई, जबकि मंडलीय अधिकारियों द्वारा कार्रवाई के बजाय संरक्षण देने के आरोप भी पाए गए। इसी कारण मंडलीय और जनपदीय कार्यालयों के पूरे स्टाफ को मुख्यालय से अटैच किया गया है।

Related Articles

Back to top button