नैनीताल। उत्तराखंड कांग्रेस में बागी नेताओं को पार्टी में पुनः शामिल करने के फैसले के बाद सियासी बवाल तेज हो गया है। रामनगर से पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल ने इस कदम के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखे तेवर अपनाए हैं।
पूर्व सांसद ने जताई नाराजगी
डॉ. पाल ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने बागी कांग्रेसी को रामनगर विधानसभा सीट से नामांकन के दो दिन पहले प्रत्याशी बनाया था। उन्होंने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ चुनाव लड़ा और जीत के बेहद करीब थे, लेकिन कुछ अंतर से हार गए। ऐसे में अब जो लोग बागी नेताओं को कांग्रेस में वापस शामिल कर रहे हैं, उन्होंने यह नहीं बताया कि उस समय वह बागी प्रत्याशी के लिए कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी को नामांकन वापस क्यों नहीं करवा सके।
समर्पित कार्यकर्ताओं पर तंज
डॉ. पाल ने कहा कि अगर तब ऐसा किया जाता तो पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को विधानसभा में जाने का मौका मिलता। उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि 2003 में नैनीताल लोकसभा उपचुनाव में उन्होंने 1.25 लाख वोटों से जीत हासिल की थी। इसके बाद हर लोकसभा और विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए आवेदन किया, लेकिन टिकट न मिलने के बावजूद उन्होंने कभी बगावत नहीं की।
पार्टी के हालिया फैसले का स्वागत
हालांकि, डॉ. पाल ने हाल ही में दो पूर्व विधायकों समेत अन्य नेताओं को प्रदेश कांग्रेस और हाईकमान के निर्णय के तहत पार्टी में शामिल किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन मजबूत बने, यही प्राथमिकता होनी चाहिए।




