उत्तर प्रदेशराज्य

UP में 12 साल बाद बनेगा नया वेज बोर्ड, योगी सरकार का बड़ा फैसला; मजदूरों की सैलरी तय करने का बदलेगा पूरा सिस्टम

उत्तर प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। योगी सरकार ने ऐलान किया है कि प्रदेश में 2014 के बाद अब नया वेज बोर्ड गठित किया जाएगा। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब हाल ही में नोएडा की फैक्ट्रियों में हुए विवाद के बाद हाईपावर कमेटी ने अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपी थीं। माना जा रहा है कि इस फैसले से प्रदेश के लाखों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

12 साल बाद वेतन निर्धारण की नई प्रक्रिया शुरू होगी

प्रदेश में हर पांच साल में वेज बोर्ड का गठन होना चाहिए, लेकिन 2014 के बाद से यह प्रक्रिया ठप पड़ी थी। इस दौरान न्यूनतम मजदूरी की मूल दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ, सिर्फ महंगाई भत्ता जोड़कर वेतन बढ़ाया जाता रहा। अब सरकार नए वेज बोर्ड के गठन के बाद मजदूरी की मूल दरों को नए सिरे से तय करेगी, जिससे श्रमिकों की आय संरचना में बड़ा बदलाव आएगा।

मई में गठन के बाद नई दरें होंगी लागू

सरकार की योजना है कि मई महीने में वेज बोर्ड का गठन किया जाए। इसके बाद बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम वेतन की नई मूल दरें तय की जाएंगी। अब तक प्रदेश में मजदूरी और महंगाई भत्ता एक ही ढांचे में चलते थे, लेकिन नए सिस्टम में इन दोनों को अलग-अलग तरीके से निर्धारित किया जाएगा।

नए वेज कोड के आधार पर होगा बदलाव

प्रदेश सरकार ने पहले ही नए वेज कोड को ध्यान में रखते हुए अंतरिम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी की है। अब वेज बोर्ड के गठन के बाद यह प्रक्रिया और व्यवस्थित हो जाएगी। इससे श्रमिकों को न केवल बेहतर वेतन मिलेगा, बल्कि वेतन निर्धारण में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

सरकार का फोकस: श्रमिक हित और औद्योगिक विकास साथ-साथ

श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता श्रमिकों के हितों की रक्षा करते हुए औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाना है। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में श्रमिकों के हितों का ध्यान रखा गया है और बड़े स्तर पर कोई आंदोलन नहीं हुआ।

नोएडा घटना के बाद तेज हुआ फैसला

सरकार के मुताबिक, नोएडा में हाल ही में हुए बवाल के बाद वेज बोर्ड के गठन की प्रक्रिया को तेज किया गया है। पहले भी इस पर काम चल रहा था, लेकिन अब केंद्र सरकार द्वारा फ्लोर वेज जारी होने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।

मजदूरी दरों में पहले ही हुआ बड़ा बदलाव

अप्रैल से लागू अंतरिम मजदूरी दरों में पहले ही बढ़ोतरी की जा चुकी है। नोएडा-गाजियाबाद क्षेत्र में अकुशल मजदूरों की मजदूरी 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दी गई है। वहीं अर्धकुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं। अन्य नगर निगम और जिलों में भी मजदूरी दरों में संशोधन किया गया है।

क्या होगा फायदा?

नए वेज बोर्ड के गठन से श्रमिकों की बेसिक सैलरी बढ़ने की उम्मीद है, जिससे उनकी कुल आय में स्थायी वृद्धि होगी। साथ ही उद्योगों में वेतन को लेकर पारदर्शिता आएगी और श्रमिकों व नियोक्ताओं के बीच संतुलन बेहतर होगा। यह कदम प्रदेश के औद्योगिक माहौल को भी स्थिर करने में अहम भूमिका निभा सकता है।


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