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नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत जनवरी 2026 तक कुल 173 सीवेज उपचार संयंत्र कार्यरत

जल शक्ति राज्यमंत्री राज भूषण चौधरी ने संसद को बताया कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत, जनवरी 2026 तक कुल 173 सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) शुरू किए जा चुके हैं और वर्तमान में कार्यरत हैं, जबकि इस बीच 8 और एसटीपी का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा 1 और एसटीपी का कार्य 31 मार्च तक पूरा होने की संभावना है। चल रही परियोजनाओं की समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर गहन निगरानी की जाती है।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) का अधिदेश नदी बेसिन दृष्टिकोण अपनाते हुए गंगा नदी के प्रदूषण को प्रभावी रूप से कम करने और उसका पुनरुद्धार सुनिश्चित करना है। इसका प्राथमिक लक्ष्य नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत गंगा नदी की मुख्य धारा और उसकी प्रमुख सहायक नदियों के प्रदूषण को कम करना और उनका संरक्षण करना है।

नदी सफाई के कार्य क्षेत्र का विस्तार करने और बेसिन स्तर पर समग्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए, एनएमसीजी गंगा बेसिन में छोटी नदियों और सहायक नदियों का पुनरुद्धार करने के लिए राज्य सरकारों को सहायता और समर्थन प्रदान करता है। इस संबंध में, संबंधित विभागों के समन्वय से, उपयुक्त पुनरुद्धार उपायों की आयोजना और कार्यान्वयन के लिए राज्यों को तकनीकी मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की जाती है।

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत, काली पश्चिम और हिंडन नदियों के पुनरुद्धार के लिए 280 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) की उपचार क्षमता वाली कुल 8 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाएं शुरू की गई हैं।

नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत नदी बेसिन प्रबंधन में सुधार करने के लिए एलआईडीएआर, यूएवी और ड्रोन आधारित सर्वेक्षण आदि जैसी उन्नत सर्वेक्षण तकनीकों का उपयोग किया गया है। गंगा की मुख्य धारा पर मिलने वाले जल स्रोतों की सटीक वीडियोग्राफिक दृश्य और मानचित्रण करने के लिए एक ड्रेन डैशबोर्ड विकसित किया गया है। यह डैशबोर्ड जियो-टैग की गई सूचना प्रदान करता है और राज्य और जिला स्तरीय अधिकारियों को प्रदूषण वाले स्रोतों की निगरानी करने, कार्यकलापों को प्राथमिकता देने और प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया करने में सक्षम बनाता है।

आपको बता दें, भारत सरकार ने 9 अक्टूबर, 2018 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से गंगा नदी के लिए न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह को अधिसूचित किया, जिसे नदी के विभिन्न स्थलों पर बनाए रखना आवश्यक है। अधिसूचना के अनुसार, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा 1 जनवरी, 2019 से ई-फ्लो की निगरानी की जा रही है। सीडब्ल्यूसी 11 परियोजनाओं की निगरानी कर रहा है और तिमाही प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। इन रिपोर्टों के अनुसार, अधिकांश परियोजनाओं में ई-फ्लो का अनुपालन हुआ है। अनुपालन न होने की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई की जाती है।

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