आनंदपुर साहिब में आशा भोसले का यादगार दौरा, विरासत-ए-खालसा उद्घाटन पर शबद गायन से बांधा था समां

रूपनगर। प्रसिद्ध गायिका Asha Bhosle भले ही अपने जीवन में केवल एक बार आनंदपुर साहिब आईं, लेकिन उनका वह दौरा आज भी स्थानीय लोगों की यादों में जिंदा है। वर्ष 2001 में विरासत-ए-खालसा के उद्घाटन अवसर पर उनकी उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक क्षण को और खास बना दिया था।
विरासत-ए-खालसा के पहले चरण का हुआ था उद्घाटन
उस समय पंजाब में Parkash Singh Badal के नेतृत्व वाली सरकार थी और आनंदपुर साहिब में विरासत-ए-खालसा का निर्माण तेजी से चल रहा था। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव से पहले नवंबर 2001 में इसके पहले चरण का उद्घाटन किया गया था, जिसे यादगार बनाने के लिए देश-विदेश की कई प्रमुख हस्तियों को आमंत्रित किया गया था।
विशेष निमंत्रण पर पहुंचीं थीं, शबद गायन से बनाया माहौल भक्तिमय
पंजाब सरकार के विशेष निमंत्रण पर पहुंचीं आशा भोसले ने इस अवसर पर शबद गायन कर समागम को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। हारमोनियम और तबले की संगत में उन्होंने ‘मेरे साहेब तू निमानी मानी’ और ‘अरदास करी प्रभु अपने आगे’ जैसे शबद गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया, जिसे वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने लंबे समय तक याद रखा।
पवित्र धरती पर टेका माथा, जताई श्रद्धा
आनंदपुर साहिब पहुंचकर उन्होंने खुद को धन्य बताया था। उन्होंने कहा था कि यह वही पावन धरती है, जहां दशमेश पिता Guru Gobind Singh ने खालसा पंथ की स्थापना की थी और जहां तख्त श्री केसगढ़ साहिब स्थित है। इस दौरान उन्होंने श्रद्धा भाव से इस पवित्र धरती पर माथा टेका था।
कुछ घंटों का दौरा बना हमेशा के लिए यादगार
हालांकि उनका यह दौरा कुछ घंटों का ही था, लेकिन उस दिन की स्मृतियां आज भी आनंदपुर साहिब के लोगों के दिलों में बसी हुई हैं। उनके शबद गायन और सादगी भरे व्यक्तित्व ने इस ऐतिहासिक आयोजन को हमेशा के लिए खास बना दिया।



